भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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पठन-पाठन के आदेश

१०---पठन-पाठन के आदेश

“पालनीया गुरोराद्या ।”

( सूक्ति )

गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिये ।

“सर्वेषां मेघदानानां, विद्यादानं विशिष्यते ।”

( भौति-शास्त्र )

सब प्रकार के दानों में विद्यादान श्रेष्ठ है ।

हमारे प्राचीन गुरुकुलों और ऋषिकुलों की पाठ-प्रणाली बड़ी सुखद थी । आज कल की भाँति अनेक प्रकार के प्रतिबन्ध नहीं थे । पढ़ने वाले और पढ़ाने वालों में परस्पर शिष्य और गुरु का सम्बन्ध था । एक पुत्र और दूसरा पिता के समान माना जाता था और इसी प्रकार का परस्पर व्यवहार भी किया जाता था । यही कारण है कि पठन-पाठन में विशेष असुविधा न थी ।

सैत्तिरीयोपनिषद् में विद्यार्थी और अध्यापक के लिये बड़े ही उत्तम आदेश किये गये हैं । उन्हें हम यहाँ उद्धृत करते हैं :—

ऋतस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च । सत्यस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च । तपस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च । दमस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च । शमस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च । श्रद्धयस्त्र स्वाध्याय प्रवचने च ।

१—नियमबद्धता के साथ विद्या को पढ़ना और पढ़ाना चाहिये ।

२—सत्य-भियता के साथ विद्या को पढ़ना और पढ़ाना चाहिये ।

३—परिश्रम-शीलता के साथ विद्या को पढ़ना और पढ़ाना चाहिये ।

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