ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
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ब्रह्मचारिणी देवियाँ
या कि धार्मिक पुरुषों और विद्वान् तथा गुणियों के आदर्श-चरित्र का अनुकरण करना चाहिये।
ब्रह्मचरिणी अम्बा—इनकी रची हुई ऋग्वेद में ५ ऋचायें हैं। जिनमें अम्बा की महत्ता गायी गई है। इससे यह सूचित होता है कि इनका सिद्धान्त था कि अम्बा से ही मनुष्यजाति का कल्याण हो सकता है।
सती सावित्री—सत्यवान् की पत्नी थीं। विवाह से पूर्व ही नारद जी ने उनके पिता से कहा कि जिनसे आप इसका विवाह करनेवाले हैं, वह थोड़े ही दिन जीयेगा। यह सुन कर उनके पिता ने दूसरे से उसका विवाह करना चाहा। पर ब्रह्मचारिणी सावित्री ने उन्हें ऐसा करने से रोका। अन्त में उनके हठ से उनका विवाह सत्यवान् से हो गया। कुछ दिनों में वन में उनका देहान्त हो गया। यमराज उसे लेने आये पर इस पतिव्रता ने प्ररनोत्तर से उनके भी झुके छुड़ा दिये। अन्त में हार मान कर इनके पति को जिलाना पड़ा।
देवी दमयन्ती—यह राजा नल की स्त्री थीं। इन्होंने स्वयं इनके साथ स्वयंवर स्वीकार किया। राजा नल अपना सारा राज्य-पाट जुट्टे में हार गये। वन में ले जाकर इन्होंने पतिव्रता दमयन्ती को बड़ी बुरी दशा में छोड़ दिया और आप भाग गये। पर ये किसी प्रकार अपने पिता के घर पहुँचीं और मिथ्या स्वयंवर की बात रच कर पुनः नल से मिलीं। इतना होने पर भी उसने अपने प्यारे पति का प्रगाढ़ प्रेम नहीं छोड़ा।
सती सुलोचना—यह लक्ष्मीराज रावण के महावली पुत्र मेघनाद की पत्नि थीं। श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण ने संभ्रम में