भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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महिलाओं का महत्त्व

है। यदि वह इसका पूर्ण-रूप से पालन कर सकी, तो वह स्त्री संसार में देवी का स्थान ग्रहण करती है।

हमारे विचार से पातिव्रत भी स्त्रियों के लिये एक प्रकार का गार्हस्थ्य 'ब्रह्मचर्य' है। इसमें भी प्रायः बहुत साधना की आवश्यकता होती है। अपने पति के साथ भी शास्त्र की मर्यादा का उल्लंघन करना न्यमिचार है। गृहस्थ स्त्रियों के लिये यह अत्यन्त आवश्यक है कि वे इस आवश्यक ब्रह्मचर्य का पालन कर गृहस्थाश्रम को सुखमय बनाती रहें।

६—महिलाओं का महत्त्व

“स्त्री दिव्या शोभते गृहे ।”

( चाणक्य-नीति )

दिव्य ( गुणों वाली ) स्त्री घर में शोभित होती है।

हिन्दू-धर्म के इतिहास में देवियों के अनेक पवित्र चरित्रों का वर्णन आया है। प्रायः जिसने प्राचीन ऋषि-महार्षि ग्रन्थकार हुये हैं, सवों ने स्त्रियों के गौरव की कुछ न कुछ अवश्य प्रशंसा की है। स्त्री प्रधानतया प्रकृति की शक्ति है। इसके बिना सृष्टि-रचना असम्भव है। इसी से मनुस्मृति में लिखा है कि ब्रह्माजी ने प्रारम्भ में अपने शरीर के दो टुकड़े किये। एक भाग से पुरुष और दूसरे से स्त्री की रचना की।

वैदिक काल स्त्रियों के लिये स्वर्ण-युग था। उस समय ये आज कल की भाँति हीन नहीं थीं। बहुत से उदाहरणों से यह ज्ञात होता