भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 224, कुल 380 में से

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महिलाओं का महत्त्व

स्त्री की प्रसन्नता में सब की प्रसन्नता है। यदि वह घर में अभ्यसन्न हो, तो कुछ भी नहीं अच्छा लगता।

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते, सर्वास्तत्रा फलाः क्रियाः ॥

जहाँ स्त्रियों का आदर होता है, वहाँ देवगण निर्वास करते हैं। और जहाँ इनका निरादर होता है, वहाँ सारे कार्य निष्फल हो जाते हैं।

शोचन्ति जामयां यत्र, विनश्यत्याशु तत्कलम्। न शोचन्ति तु यत्रैताः, चर्द्वन्ते तदुधि सर्वदा ॥

जिन घरों में स्त्रियाँ कष्ट पाती हैं, वे शीघ्र नष्ट हो जाते हैं। और जिस कुल में ये सुख पाती हैं, वे सदैव उत्पति करते हैं।

सन्तुष्टो भार्यया भर्त्ता, भर्त्रा भार्या तथैवच। यस्मिन्नेव कुले नित्यं, कल्याणं तत्र वै ध्रुवम् ॥

जिस कुल में पत्नी से पति सन्तुष्ट रहता है और उसी भाँति पति से पत्नी सदैव प्रसन्न रहती है, उस कुल में कल्याण होमा निश्चित है।

मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते, धान्यं यत्र सुसञ्चितम्। द्वामपत्य-कलहो नास्ति, तत्र श्रीः स्वयमागता ॥

( चाणक्यनीति )

जिस गृह में मूर्खों का आदर नहीं होता—जहाँ अन्न सम्भित रहता है और जहाँ पति-पत्नी में कलह नहीं रहता, वहाँ लक्ष्मी स्वयं आती है।

पृथिव्यां यानि तीर्थानि, सतीपादेषु तान्यपि। तेजस्त्रा सर्वदेवानां, मुनीनाञ्च सतीषु च ॥

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