भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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स्त्री-जाति पर विदेशी मत

७—हृदय में दुर्बलता, भोजन में अरुचि, भोग में आसक्ति, चित्त में अशान्ति तथा शयन में अनिद्रा हो जाती है ।

८—क्रोध, अतुल्लाह, अधैर्य, अविचार, अकार्य और लोभ बाला स्वभाव बन जाता है ।

९—जीवन भारतूप और दुःखमय जान पड़ने लगता है ।

१०—रोग पर रोग लगे रहते हैं, जिससे असमय में ही मृत्यु हो जाती है ।

आजकल प्रायः स्त्रियाँ इन दुर्दशाओं को भोग रही हैं । अत-एव यदि वे अपने को इनसे बचाना चाहें, तो अपने पत्नियों को भी सदाचारी बनायें और स्वयं सदाचारिणी बनने का उद्योग करें । यदि स्त्रियाँ चाहें, तो यह कोई उनके लिये बहुत कठिन काम नहीं है । धीरे-धीरे अभ्यास से अपने दोषों को निश्चय पूर्वक वे दूर कर सकती हैं ।

१५—स्त्री-जाति पर विदेशी मत

इस शीर्षक में हम उन विदेशी विद्वानों का मत उद्धृत करते हैं, जिन्होंने कि स्त्री-जाति के सम्बन्ध में बहुत विवेचना कर लेने पर ही अपना विचार प्रकट किया है :—

साध्वी स्त्री संसार के सब ऐश्वर्यों से वद्ध कर है । वह एक स्वर्गीय देवी है, जिसमें सम्पूर्ण दिव्य गुण निवास करते हैं ।

( जर्मनी टेडर )

संसार के आचार को बनाना, गृह का प्रबन्ध करना तथा