ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 380 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहचर्य-विज्ञान
२४०
कोमलता, प्रेम, और सहन-शीलता से जीवन की कठिन और विषम यात्रा को सरल और सुखद बनाना खी का हा काम है ।
( टामसन )
इस संसार में खियों का राज्य है । ये ही माताओं, पुत्रियों और पत्नियों के रूप में इस जीवन के सङ्कल्पित मार्ग को विस्फुट बनाती हैं ।
( मांट गुमरी )
किसी देश की परम्परा और जाति-नियम कुछ भी हो, पर धर्म और सद्भाव की निष्पत्ति खियों के हाथ में होती है ।
ये देवियों हमारी पूजनीया हों या सहचरी नायिका हों या परिचारिका, इनका अखण्डनीय प्रभाव हम पर पड़ता है ।
( माटिन )
वह कौन सा आकाश है, जहाँ खी का प्रेम नहीं चढ़ता और वह कौन सा पाताल है, जहाँ वह नहीं डवरता ।
( कार्लिडन )
खी हमारे अधिध्यास और कठोरता से सुखे हृदय को प्रफुल्लित कर देती है । इन्हीं देवियों के प्रताप से नरक भी स्वर्ग बन जाता है ।
( लार्ड बाइरन )
मेरा जहाँ तक अनुभव है—मैं कह सकता हूँ कि सर्वत्र खियों कोमल-हृदया, दयाशीला, धर्म-परायणा और परोपकारिणी होती हैं । श्रद्धा, लज्जा और दया—ये तीन सहेलियाँ ती कभी इनका साथ नहीं छोड़तीं ।
( लिबार्ड )