भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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ग्रहचर्य-विज्ञान

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कोमलता, प्रेम, और सहन-शीलता से जीवन की कठिन और विषम यात्रा को सरल और सुखद बनाना खी का हा काम है ।

( टामसन )

इस संसार में खियों का राज्य है । ये ही माताओं, पुत्रियों और पत्नियों के रूप में इस जीवन के सङ्कल्पित मार्ग को विस्फुट बनाती हैं ।

( मांट गुमरी )

किसी देश की परम्परा और जाति-नियम कुछ भी हो, पर धर्म और सद्भाव की निष्पत्ति खियों के हाथ में होती है ।

ये देवियों हमारी पूजनीया हों या सहचरी नायिका हों या परिचारिका, इनका अखण्डनीय प्रभाव हम पर पड़ता है ।

( माटिन )

वह कौन सा आकाश है, जहाँ खी का प्रेम नहीं चढ़ता और वह कौन सा पाताल है, जहाँ वह नहीं डवरता ।

( कार्लिडन )

खी हमारे अधिध्यास और कठोरता से सुखे हृदय को प्रफुल्लित कर देती है । इन्हीं देवियों के प्रताप से नरक भी स्वर्ग बन जाता है ।

( लार्ड बाइरन )

मेरा जहाँ तक अनुभव है—मैं कह सकता हूँ कि सर्वत्र खियों कोमल-हृदया, दयाशीला, धर्म-परायणा और परोपकारिणी होती हैं । श्रद्धा, लज्जा और दया—ये तीन सहेलियाँ ती कभी इनका साथ नहीं छोड़तीं ।

( लिबार्ड )