भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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खी-जाति पर विदेशी भत

पुरुष को प्रसन्न रखने में खी की प्रसन्नता है। वह पुरुष की प्रसन्नता के लिये प्रायों को बलि तक दे सकती है।

( काउंटी पटमोर )

संसार-वाटिका में सती खी सबसे सुन्दर सुमन है। उसकी कोमलवा, उसकी सुगन्धि और रमणीयता—एक से एक बढ़ कर मनोहर है।

( थोकरे )

खी की सुन्दरता किस बात में हैं ? परोपकार और निश्छल भक्ति में तथा सन्तोष और सहनशीलता में—ये गुण उसके लावण्य को चमकाते, तेज को बढ़ाते तथा उसे देवता बनाते हैं।

( मिल्टन )

प्रसन्न मन और प्रसन्न वदन होना साहित्युत, सहास्रभूति, दुष्टि की सीमता, स्मृति की पीड़ता और दूसरे के मनको सहज में खींच लेना—इन गुणों में स्त्रियों अद्वितीय हैं।

( गबबोल )

देवियों के हृदय पर एक बार जो बात अङ्कित हो जाती है, उसका भिटाना फिर बड़ा कठिन हो जाता है।

( थेकरे )

इस बात को अपने मस्तिष्क से निकाल दो कि तुम स्त्रियों से गौरवशाली हो ! स्त्रियाँ तुम्हारी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं की सङ्गिनी हैं। वे तुम्हारे सुख-दुःख में सहायता देती हैं।

( बेजिनी )