भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य-विधान

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भी हम इसके अभाव से होने वाली हानियों का कुछ वर्णन यहाँ पर कर देना चाहते हैं:—

(१) ब्रह्मचर्य के नाश से अन्तःकरण अपवित्र और दुर्बल हो जाता है ।

(२) वीर्य-क्षय से मन मलीन, शरीर हीन और आत्मा अनुत्साही बन जाता है ।

(३) ब्रह्मचर्य का नाश करनेवाला पुरुष बिना तेल के दीपक की भाँति लुफ जाता है ।

(४) वीर्य-नाश से पद-पद पर विपत्तियाँ आती रहती हैं, जो रोकी नहीं जा सकती ।

(५) बड़े-बड़े पुरुष भी ब्रह्मचर्य से पतित होते ही संसार में आँसू हो गये ।

(६) वीर्य-क्षय से धातु-रोग, रक्तविकार, शिरोरोग, दृष्टि-हीनता, अजीर्ण, कोष्ठवद्धता, मन्थ, वात, पक्षाघात, मन्दाग्नि, हृदय हीनता, आलस्य, उन्माद, भ्रम, सुग्री, श्वास, भय आदि अनेक शारीरिक और मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं ।

(७) वीर्य-नाश से आनन्द, साहस, धैर्य, वीरत्व, तेज, शान्ति, ज्ञान और सद्भाव आदि नष्ट हो जाते हैं ।

(८) वीर्य-नाश से बढ़ कर महा पातक है ही नहीं ।

(९) वीर्य-क्षय, धम और घ्न के क्षय का कारण बनता है ।

(१०) एक विन्धु वीर्य-नाश से असंख्य जीवों की हत्या होती है ।