भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य के कुछ उपदेश

ने जनकपुर में शिवजी के भीषण पिनाक को खण्ड-खण्ड कर ढाला। ब्रह्मचर्य की ही महिमा से शुकदेवजी को ८८ सहस्र बड़े-बड़े श्रुतियों में उच्चासन दिया गया। ब्रह्मचर्य-व्रत से ही शङ्कराचार्य ने पुनः वैदिक धर्म का प्रचार किया। ब्रह्मचर्य के ही पालन से स्वामी दयानन्द ने पाखण्डों का खण्डन कर सत्य धर्म को पुनः जागृत किया। जो कुछ संसार में उत्तमता नाम से प्रसिद्ध है, वह सब ब्रह्मचर्य की ही विभूति है।