ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मचर्य-विद्यान
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(१) बाल-विवाह
इसमें निर्वाध बालक का विवाह एक अव्योध बालिका के साथ कर दिया जाता है। ये दोनों अध्यात्मावश विषय में रत होकर कुछ दिनों में हृत्-वीर्य हो जाते हैं और इससे प्राणों का भय भी हो जाता है। यदि पुरुष मरा तो जन्म भर वह स्त्री विषवा दुःख घटती है, और यदि स्त्री मरी तो उसका हीन-वीर्य पति दूसरी कन्या से विवाह कर उसका भी सर्वनाश कर देता है।
देखिये ! बाल विवाह के सम्बन्ध में स्वामी दयानन्द क्या कहते हैं:—
“जिस देश में ब्रह्मचर्य-विद्या-रहित बाल्यावस्था में विवाह होता है, वह देश दुःख (सागर) में डूब जाता है। क्योंकि ब्रह्मचर्य-विद्या के ग्रहण-पूर्वक विवाह के सुधार से सुधार और बिगाड़ से बिगाड़ होता है।”
अब हम बाल-विवाह से होनेवाली कुछ हानियों को नीचे लिखते हैं:—
(१) तेजस्वी बालक भी बाल्यावस्था के विवाह से मूर्ख तथा हतभागी बन जाता है।
(२) प्रथम तो सन्तान होती ही नहीं, यदि होती भी है, तो रोगी और निर्वल हो कर शीघ्र ही मर जाती है।
(३) युवावस्था आते आते सब शक्तियाँ क्षीण हो जाती हैं।
(४) बाल-विवाह से बालिकाओं का भी बड़ी अहित होता है जो बालकों का।