भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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वीर्य-नाश के प्रधान कारण

(५) वालिकायें कृष्णा, निर्बला, कुलदा, बुद्धिहीना होकर शीघ्र मर जाती हैं।

*(६) बाल-विवाह से देश और जाति की सब से बड़ी हानि होती है।

(२) वृद्ध-विवाह

“वृद्धस्य तरुणी विपम् ।”

( वर्क )

वृद्ध पुरुष के लिये तरुणी की विप के समान होती है।

इसमें घन के लोभ से एक वृद्ध पुरुष के साथ निरी वालिका का विवाह कर दिया जाता है। जब तक वह युवती होती है, तब तक ये यमपुरी को प्रस्थान कर देते हैं। वह अब अवज्ञा वैधव्य के कठोर दण्ड को न सहकर गुप्त रूप से न्यभिचार करती है। गर्भ रह जाने पर भ्रूण-हत्या के पाप को भी लाल-भय के कारण कर बैठती है। इस प्रकार भी काम न चला, तो वह घर से बाहर निकल जाती है, और बेरहा हो जाती है या किसी विधर्मी के यहाँ आश्रय पाती है।

वृद्धावस्था में मैथुन की शक्ति यों ही घट जाती है। इस समय पुरुष को जितेन्द्रिय होकर योग-द्वारा जीवन व्यतीत करना सिखा है। इसी अवस्था में संसार में धर्म तथा जाति की सेवा हो सकती है। पर हमारे आत्मानि वृद्ध हिन्दू-धर्म के मूलोच्छेदन पर तुले हुये हैं। इससे बढ़कर परिताप की और क्या बात होगी!

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