भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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मूलचर्य-विधान

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देखिये, वृद्ध-विवाह के सम्बन्ध में स्वामी स्व-श्रद्धानन्द जी क्या कहते हैं:—

“वृद्ध-विवाह से विधवाओं की संख्या बढ़ रही है। इनके कारण समाज में बड़ी अमर्यादा हो रही है, पर द्विजाति लोग इनका उद्धार करने से डरते हैं। इसलिये हमारा तो यही अनुरोध है कि ४० वर्ष की अवस्था के पश्चात् किसी पुरुष का विवाह न होने देना चाहिये।”

अब हम वृद्ध-विवाह से होने वाली कुछ हानियों को नीचे लिखते हैं:—

(१) वृद्ध-विवाह से कुल का नाश हो जाता है।

(२) जाति में स्त्रियों की कमी से नवयुवकों का अधिकार लज्जित जाता है।

(३) विधवायें अधिक उत्पन्न होती हैं।

(४) वृद्ध से विवाहित स्त्रियाँ व्यभिचार कराती हैं।

(५) बहुत सी आत्म-हत्यायें और भ्रूण-हत्यायें हो जाती हैं।

(६) वृद्ध पुरुष की सन्तान में अनेक दुर्गुण होते हैं।

(७) वृद्ध लोग समाज की सेवा से विरक्त रह जाते हैं।

(८) वृद्ध-विवाह से देश में वेश्याओं की संख्या बढ़ती है।

( ३ ) वेश्या-गमन

वेश्यास्त्री भदन-ज्वाला, रूपेण्डन समेधिता । कामसिर्ष्य हृष्यन्ते, यौधनानि धनानि च ॥

( भरद्वाज-शतक )