भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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मनुष्य-विज्ञान

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अब हम ब्राह्मसूहर्त में उठने के कुछ लाभों को नीचे लिखते हैं: (१) ब्राह्मसूहर्त में जागने से दुःख तीव्र होती है। (२) मनुष्य रोग रहित और स्वस्थ बनता है। तथा लक्ष्मीबायू और यशस्वी होता है। (३) मन की सद्वृत्तियाँ जागृत होती हैं।

( २ ) उपःपान

सचितुः समुदयकाले, प्रसूती सलिलस्य पिवेदष्टो। रोगजरा परिमुक्तो, जीवेष्टस्वर शतं सायम् ॥

( आशुर्वेद

जो मनुष्य सूर्य के उगने से कुछ पहले आठ अञ्जली जल पीता है, वह रोग और दुःखता से रहित हो कर दो वर्षों से भी अधिक जीता है।

वैद्यक के प्रायः सभी आचार्यों ने उपःपान करने का समय सूर्योदय से पहले ( ब्राह्मसूहर्त ) माना है। इस समय का जल पीना बड़ा लाभदायक होता है। शरीर के सब रोग इससे दूर हो सकते हैं। हमें स्वयं भी इस बात का अनुभव है। अब तक हमने कई रोगियों को उपःपान की विधि से अच्छा किया है। ऊप के श्लोक में आठ अञ्जली जल पीने को लिखा गया है। पर देश, काल तथा बल के अनुसार कम भी कर दिया जा सकता है।

अब हम उपःपान के गुणों को नीचे लिखते हैं:—

  • ( १ ) उपःपान से वीर्यसम्बन्धी कई रोग दूर हो जाते हैं।
  • ( २ ) काम-विकार को शान्ति मिलती है।
  • ( ३ ) और शरीर में बल्यता नहीं बढ़ती।
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