भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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वीर्य-रक्षा के सक्षिप्त

(१) कौपीन पहनने से भयङ्करोप नहीं बढ़ता । (२) इन्द्रियों में प्रचुर शक्ति स्थित होती है (३) मन पर अपना अधिकार हो जाता है । (४) वल, उत्साह, स्फूर्ति, सदाचार, सत्यम और सत्सङ्ग आदि की वृद्धि होती है ।

(८) प्राणायाम-साधन

दहान्ते ध्मायमानानां, धातुनां हि यथा ।मलाः । तयेन्द्रियाणां दहान्ते, दोषाः प्राणस्य निग्रहात् ॥

( मनुस्मृति )

जैसे अग्नि में डालकर तपाने से धातुओं के मल जल जाते हैं, वैसे ही प्राणायाम के करने से इन्द्रियों के सब दोष भस्म हो जाते हैं ।

प्राणायाम की विचित्र शक्ति का बोध प्राणायाम करनेवाले लोगों को ही पूर्ण रूप से होता है, पर साधारण जनता भी इसके अमूल्य लाभों से अपरिचित नहीं है । यह प्राणायाम ब्रह्मचारी और योगियों के लिये विशेष रूप से प्रविश्वित है । गृहस्थाश्रम में रहने वालों के लिये भी प्राणायाम की आज्ञा है ॥ इसको उत्पन्न रीति से करते रहने से अनेक कष्ट-साध्य रोग दूर हो जाते हैं ।

प्राणायाम सन्ध्योपासन का भी सब से प्रधान अङ्ग है । वीर्य-


ॐ प्राणायाम के सारगन्ध में विशेष चार्ले ज्ञान के लिये लेखक का 'प्राणायाम-व्यायाम' नामक ग्रन्थ पढ़िये !

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