ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
पृष्ठ 321, कुल 380 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहाचर्य-विद्वान
३१
याम करने से अनेक लाभ होते हैं । जिनका हम नीचे वर्ण करते हैं—
( १ ) प्राणायाम के अभ्यासी के हृदय में काम-विकार नष्ट होता ।
( २ ) मन और इन्द्रियों पर अधिकार प्राप्त होता है ।
( ३ ) बुद्धि तथा वल की बुद्धि होती है ।
( ४ ) बुद्धता, योग तथा चीणता का भय नहीं रहता ।
( ५ ) वीर्य की अयोगति नहीं होती ।
( ६ ) शारीरिक और मानसिक विकास होता रहता है ।
( ७ ) मनुष्य की दैवीगुण प्राप्त होते हैं ।
( ८ ) अधर्म की ओर विचलन नहीं जाता ।
( ९ ) दीर्घायु और सुसन्तान प्राप्त होती है ।
( १० ) कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाते हैं ।
(६) मानसिक योग
“समस्वं योग उच्यते ।”
चित्त की समता का नाम योग है ।
ज्ञाननिष्ठो विरक्तो वा, धर्मशोडषि जितेन्द्रियः ।
विना योगेन देवोऽपि, न मोक्षं लभते भिये ॥
( योग-गीता )
( भगवान् शङ्कर पार्वतीजी से कहते हैं ) हे पार्वती ! वड़ा ज्ञानवान्, वैरागी, धर्मिष्ठ और जितेन्द्रिय कोई मनुष्य क्यों न हो, पर विना योग के मुक्ति का अधिकारी नहीं बन सकता ।