भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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प्रश्नचर्य-विज्ञान

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(१२) सात्विक भोजन

आयुः सत्त्वश्लोकोर्यं, सुखभीतिविवर्द्धनाः ।

रस्याः स्निग्धास्थिरा हृद्या आहाराः सात्विकप्रियाः ॥

( भगवद्गीता )

जो आहार आयुष्य, ओज, बल, आरोग्य, सुख और प्रीति के बढ़ाने वाला हो और जो सरस, चिकना, शुद्ध तथा रुचि-बर्द्धक हो वह सात्विक लोगों को प्रिय होता है ।

प्रश्नचर्य पालन करने वालों को आहार पर बहुत ध्यान देना चाहिये । तामस आहार से कभी वीर्य-रक्षा नहीं हो सकती । सात्विक आहार करते रहने से मानसिक वृद्धि भी सात्विक ब जाती है ।

( १ ) सात्विक आहार से शरीर की सब धातुओं को लाभ पहुँचता है । ( २ ) बुद्धि और शक्ति बढ़ती है । ( ३ ) काम क्रोध, मद, लोभ और मोह का नाश होता है । ( ४ ) स्वारस्य और जीवनी-शक्ति की वृद्धि होती है ।

१३—फलआहार

वैद्यक शास्त्रों में फलआहार के अपरिमित लाभों का वर्णन है इस बात को प्रायः सभी लोग जानते होंगे कि हमारे ऋषि-मुनि फलआहारी होते थे । बहुत से लोग ऐसी भी हुए हैं कि जिन्होंने फल या मूलों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं खाया है । दूसरा ऋषि दूध ही खाकर बहुत दिनों तक जीवित रहे ।