ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअध्यायार्थ विज्ञान
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वास्तव में दूध से बहुकर कोई खाने-पीने योग्य पदार्थ है। नहीं। यही कारण है कि इस देश के ऋषि-महर्षि तक अपास गौ रखते थे। यह बड़ा ही सात्विक आहार है।
केवल दूध पीकर भी कई दिनों तक रहा जा सकता है। ७ लोग यह ख्याल करते हों कि दूध पीने से बीर्य-रत्ना नहीं हो सकते वे भूल करते हैं। थोड़ा सा धारोष्ण दूध पीना बड़ा ही हितक होता है। इस दूध से काम-विकार उत्पन्न नहीं होता। ताप निकला हुआ दूध बहुत गुणकारी होता है। शास्त्रों में लिखा है:— “पीयूषोऽभिनवे पय।”
तुरन्त के लुहे हुए दूध का नाम ही पीयूष है। इस विषय : गौ का दूध ही मान्य है। जिस आदि के दूध में वह बात नहीं जिस का दूध तमोगुण बढ़ाता है। वह विषय की उत्तेजना भी प्रका करता है।
अब हम दुग्धपान से होने वाले कुछ गुणों को नीचे देते हैं:
(१) गौ का धारोष्ण दूध थोड़ा सा प्रातःकाल पीने से मन को शान्ति मिलती है। (२) पवित्र लुछि, साक्षाहस, पदुमे पदुमे में उत्साह, धार्मिक विचार तथा आनन्द उत्पन्न होता है। (३) कई प्रकार के धातु सम्बन्धी रोग नष्ट हो जाते हैं। (४) चीणता, हास तथा अन्य दोषों को नष्ट कर हृदय, मस्तिष्क तथा सर्वोच्च पुष्ट तथा तेजस्वी बनता है। (५) न्यर्थ की उत्तेजना शान्त करता है।