भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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ग्रन्थस्ये-विज्ञान

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(१७) नियम-बद्धता

मनुष्य-जीवन को सुख और शान्तिमय बनाने में नियम-बद्ध का बहुत बड़ा हाथ होता है। जो लोग नियम से अपने फाम कर वाले नहीं होते, वे कभी उच्च और आदर्श पुरुष नहीं बन सकते। भारतवर्ष में और विरोध कर हिन्दू-जाति में अब नियम बद्धता को बहुत कम महत्व दिया जा रहा है। यहाँ की अपेक्षा पाश्चात्य देशवासी बहुत ही नियम-बद्ध होते हैं। यही कारण। कि वे विरोध करके स्वस्थ, उद्योगी, साहसी, मेधावी और हा प्रतिष्ठ होते हैं। अनियमित पुरुष कभी किसी कार्य में पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता। अतः वीर्य-रक्षा के प्रेमियों को चाहिं कि नियम-बद्ध होने का सब से पहले उद्योग करें।

जैसा कुछ नियम बनाया गया हो, उसे उचित समय पर व्यवहार में लाने का नाम 'नियम-बद्धता' है। प्रत्येक मनुष्य को चाहिये कि वह अपनी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के लिए कुछ न कुछ विचार-पूर्ण उपयोगी नियम बना ले और फिर उनके अनुसार चलने का पूरा प्रयत्न करे।

(१) नियम-बद्धता से मनुष्य अपनी सब प्रकार की ऊर्जा कर सकता है। अपने अंगीकृत कामों को पूरा कर सकता है।

(२) उद्योग-शीलता, कर्तव्यपरायणता, दृढ़ता और कार्य-कारित में मन लगता है। (३) विद्या और चत का संग्रह किया जा सकता है। और (४) विषय-भोगों की ओर चित्त नहीं दीढ़ता।

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