भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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प्राप्त्यर्थ-विज्ञान

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अब हम शुभ सङ्कल्प से होने वाले कतिपय लाभों को नीचे लिखते हैं:—

( १ ) शुभ सङ्कल्प से कार्य के करने में असफलता का भय नहीं रहता । ( २ ) मन को दृढ़ता प्राप्त होती है । ( ३ ) वाधाओं के सहने की शक्ति प्राप्त होती है । ( ४ ) कर्तव्य से विमुख होने की इच्छा नहीं होती । ( ५ ) स्वाधीन विचार जागृत हो जाते हैं ।

( १६ ) इच्छा-शक्ति-प्रयोग

आकृति देवीं सुभगां पुरो दधे । चिन्तस्य माता सुवह्ना ना श्रुतु ॥

( अथर्ववेद )

हम इच्छा-शक्ति देवी की उपासना करते हैं । वह चित्त की माता है । अतः हमारे लिये सुखदायिनी धने !

“अकामस्य क्रिया काचिद्, दश्यते नेह कर्हिचित् ।”

( मनुष्यसूति )

मनः कामना के बिना इस संसार में कोई कार्य नहीं हो सकता ।

‘या दगिच्छेच्छ भवितु, तादृगभवति पुरुषः ।’

( म० विदुर )

पुरुष जैसा होने की इच्छा करता है, वैसा बनता है ।

इच्छा-शक्ति का नाम विद्यान् लोगों ने सुना ही होगा ? मनुष्य के भीतर यह दैवी-विभूति छिपी हुई है । जो लोग इसके