भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 346, कुल 380 में से

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वीर्य रक्षा के सलियम

वन्माद तथा बुद्धि-भ्रंश इत्यादि । इसलिये प्रत्येक मनुष्य को कम से कम छः घण्टे तक तो अवश्य सोना चाहिये ।

कुछ लोग अधिक रात तक सोते हैं और सूर्य उग जाने के उपरान्त भी सोते रहते हैं । कुछ ऐसे भी हैं जो रात में जागते और दिन में सोते हैं । ऐसे लोग कदापि वीर्य-रक्षा में सफल नहीं हो सकते । सोने का प्रभाव हमारे सब अङ्गों की नस नस पर पड़ता है । समय पर न सो जाने से सब को बड़ी चूति पहुँचती है । रक्त में उष्णता उत्पन्न हो जाने से वीर्य बिगड़ कर किसी न किसी रूप में बाहर निकल जाता है ।

बहुत से विद्यार्थी ऐसे हैं जो अधिक रात तक जाग कर पढ़ते हैं, इससे वे प्रायः अस्वस्थ रहते हैं । स्नानदोष उनके पीछे लग जाता है । कौष्ठ-बद्धता के कारण मल-मूत्र त्यागने में जोर देने से उनका वीर्य बाहर निकल जाता है । ऐसे कई विद्यार्थियों को हमने सामयिक शयन से नीरोग किया है । इसलिये ब्रह्मचर्य रखने वालों को भी हम यही सम्मति देते हैं कि १० बजे रात तक अवश्य सो जाया करे, ताकि प्रातःकाल ४ बजे वे उठ सकें ।

सामयिक शयन से नीचे लिखे लाभ होते हैं:—

(१) सामयिक शयन से सारा श्रम दूर हो जाता है । (२) पुनः कार्य करने की नवीन शक्ति प्राप्त होती है । (३) आयुर्वेद कहता है । (४) स्नानदोष, धातुदोषैक्य, शिरःदोष, आलस्य, अरुणमूत्र और रक्त-विकार आदि से रक्षा होती है । (५) नेत्रों और हृदय को विश्राम मिल जाता है ।

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