भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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वीर्य-रत्ना के सन्निधम

शीर्षसन से नीचे लिम्बे लाभ होते हैं :—

( १ ) शीर्षसन के करने से दूषित रक्त भी शुद्ध हो जाता है। ( २ ) मेषा-शक्ति बढ़ती है। ( ३ ) रोगों से मुक्ति मिलती है। ( ४ ) स्वास्थ्य में अपूर्व परिर्वर्त्तन दिखाई पड़ता है। एवं ( ५ ) वीर्य को शान्ति और पुष्टता प्राप्त होती है।

(३३) आडम्बर-शून्यता

आजकल पाश्चात्य सभ्यता की हवा लग जाने के कारण समाज में आडम्बर का प्रवेश हो गया है। हमारे विचारार्थीगण जिनका जीवन सादा होना चाहिये, वे भी इसके फेर में फँस गये हैं। आडम्बर करने से मनुष्य की मान-प्रतिष्ठा बढ़ जाती है, यह बात मान लेना भारी भ्रम है। सरलता और सादगी से रहना और उच्च विचार करने से ही मनुष्य संसार में सभ्य और श्रेष्ठ बन सकता है।

हमने आडम्बरों पुरुषों और स्त्रियों में प्रायः अविवेक अधिक देखा है। आडम्बर स्वयं व्यभिचार की ओर हृदय खींच ले जाता है। आडम्बर त्रिकारों का मूल है।

व्यर्थ की वस्तुएँ लेकर शरीर की सजाना और अज्ञ-प्रत्यक्ष को वेदव रखना ही आडम्बर है। ऐसे कार्य करने वाले मूर्ख, दुराचारी और अविवेकी होते हैं। इसलिये जो लोग ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहते हों, वे अवश्य अपने को नाना प्रकार के दिखावटी आडम्बरों से दूर रखें। इसी में उनकी वास्तविक कल्याण है।