भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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विद्वानों के मत

बीरता क्यों आती है ? इन्हें महानवीर किसने बनाया ? इसी प्रश्न- चर्चे में !

ॐ ॐ ॐ

( स्वामी विवेकानन्द )

वीर्य ही साधुता है । दुर्बलता पाप है । दत्तवान् और वीर्य- वान बनने की चेष्टा करो ! छपनिपर्व के वलप्रह, आशोकप्रह और दिव्य दर्शन-शास्त्रों का अवलम्बन करो ! अन्य दुर्बलता बढ़ाने वाले विषयों को छोड़ो !

हमें ऐसे प्रसन्नचारी मनुष्य चाहिये, जिनके शरीर की नसें लोहे की भाँति और न्मातृ दुस्पात की तरह दृढ़ हों । उनको देह में ऐसा मन हा, जिसका समुद्रन वज्र से हुआ हो । हमें चाहिये पराक्रम, मनुष्यत्व, चाडवीर्य और प्रसन्नचै !

ॐ ॐ ॐ

( स्वामी नित्यानन्द )

प्रसन्नचर्य-रत्ना के लिये प्रति समय प्रयत्न करना चाहिये । वीर्य से ही आत्मा (जीव) अमरत्व को प्राप्त होता है । शरीर की संयम और सुयोग्य बनाने के लिये निवस समय तक प्रत्येक खी-तुख को प्रसन्नचर्य धारण करना चाहिये ।

ॐ ॐ ॐ

( लोकमान्य तिलक )

में विद्याधियों और तुषकों से यही कहता हूँ कि वे प्रसन्नचर्य और वस की उपासना करें । विना शक्ति और दुष्टि के अपने