ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
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अधिकारों को रक्षा और प्राप्ति नहीं हो सकती ! देश की स्वतन्त्रता वीर-व्रतियों पर ही निर्भर करती है !
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( कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ )
ब्रह्मचर्य को पुनर्जीवित करने वाले, सारी आयु बालब्रह्मचारी रह कर ब्रह्मचर्य का जीवित दृष्टान्त हमारे सामने रखने वाले—महर्षि ( दयानन्द ) का आदर्श व्यक्तिवृत्ति ही है, जो कि हमें उत्साह से मनुष्य-मात्र की सेवा के परम मार्ग पर ले जाता है। उनके जीवन का एक-एक क्षण प्रजा के सुखचिन्तन में बीता ! ईश्वर पर उनके अटल विश्वास ने, उनको सदा सीधे मार्ग पर चलने के लिये, प्रकाश दिया। स्वामीजी का उन्नत व्यक्तिवृत्ति ( ब्रह्मचर्य-व्रत पालित ) हमें जीवन-यात्रा के उचित मार्ग पर चलने के लिये उत्साह प्रदान करता है !
( माननीय मालवीयजी )
अब तो ब्रह्मचारियों का रूप ही बदल गया। कर्जन फैशन (Curzon Fashion) चल गया है। गुरु गोविन्दसिंह ने महा-भारत पढ़ कर ही क्षत्रियों में शक्ति पैदा की थी। युद्ध से पहले वे दुर्गा की स्तुति करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य का व्रत दिया, और बतला दिया कि केशों को मत काटो।
शास्त्र कहता है कि ब्रह्मचर्य में ही बल है—शक्ति है। हमारे यहाँ भीष्म और हनुमान, दो ऐसे ब्रह्मचारी हुये हैं जिनकी टकराव का ब्रह्मचारी और कहीं नहीं भिल सकता ! सदा तर्पण में इस भीष्म का स्मरण करते हैं। जानने वालों के लिये भीष्म आज