भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य-विज्ञान

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को भी साध्य बनाता हूँ। उस ब्रह्मचर्य की रक्षा से सब प्रकार का अशुभ नष्ट हो जाता है।

उनकी इस शिक्षाओं को सुन कर शिष्य-मण्डली में आनन्द का स्रोत उमड़ पड़ा। बहुत से विद्यार्थियों ने अपने हृदय में आजीवन ब्रह्मचर्य-पालन की प्रतिज्ञा की।

अब पाठक भली भाँति समझ गये होंगे कि भगवान् धन्वन्तरि जैसे वैद्य ने भी मुक्त-कण्ठ से ब्रह्मचर्य का समर्थन किया है। यदि उनके कहे पर विश्वास करके विधिवत् ब्रह्मचर्य का पालन किया जाय, तो मनुष्य को किसी प्रकार का रोग नहीं हो सकता। फिर औषधियों की आवश्यकता ही क्यों कर हो सकेगी ?

७-ब्रह्मचर्य-विज्ञान का समर्थन

‘स यो विज्ञानं प्रल्लेप्युपास्ते विज्ञानवतो वे स लोकार्मुद्धानवतोऽभिसिध्यति ।’

( छन्दोग्योपनिषत् )

जो पुरुष विज्ञान को बड़ा समझ कर, उसकी उपासना करता है, वह निश्चय कर के ज्ञानवान् होकर, ज्ञान वाले लोगों को प्राप्त होता है।

हमने अपने इस ग्रन्थ में ‘ब्रह्मचर्य’ को विज्ञान माना है। कुछ लोग इस पर आपत्ति भी कर सकते हैं। इसलिये हम इस बात की वरसा देना चाहते हैं कि हमने जो ब्रह्मचर्य को विज्ञान माना है, वह कोई नई बात नहीं है, बल्कि प्रचीन समय में भी लोग ब्रह्मचर्य को विज्ञान मानते और कहते थे। बहुत से ऋषियों ने