भारतकोश
ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh

स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्यामृत

(बदकारी) गन्दे नीचों ने सिखलादी। मैं कई वर्ष तक हस्तमैथुन अर्थात् अपने हाथों से नाश करता रहा। मैं बहुत ही सुन्दर लड़का था। खाने-पीने में भी चटोरा था। कई विद्यार्थी जो मेरी कक्षा में थे, मेरे से आयु में बड़े और शरीर से तगड़े थे, वे बड़े नीच व गुण्डे थे। वे ऊपर से मेरे से बड़ा प्रेम करते थे। मुझे अनेक बार पैसे देते, बाजार से अच्छी-२ चीजें खरीदकर खिलाते और जब मैं उनकी बात नहीं मानता तो वे मुझे डराते और धमकाते। शनैः-शनैः उन्होंने ऐसे डोरे डाले कि मुझे अपने जाल में फँसा ही लिया। कई वर्ष तक मुझे खूब खराब किया। उन्ही दिनों मेरे स्कूल के एक अध्यापक ने मेरे से प्रेम करना आरम्भ किया, इस प्रेम का कारण मेरी सुन्दरता थी। उस नीच ने भी मेरे साथ कितनी बार मुँह काला किया। जब मैं इन बुराइयों में नहीं फँसा था, अपनी कक्षा में पढ़ने में प्रथम था, शरीर सुन्दर और स्वस्थ था। अब इन बुराइयों का फल मिलने लगा। रात को स्वप्न में सप्ताह में दो बार वीर्यनाश हो जाता। पेशाब में भी गड़बड़ होने लगी। मस्तिष्क निर्बल हो गया। पढ़ने में मन नहीं लगता था, उठते बैठते अन्धेरी आती। कई वर्ष अपना नाश करते रहने के कारण शरीर भी थोथे वृक्ष की तरह निर्बल हो गया। देखने को मुख पर अभी सुन्दरता शेष थी, किन्तु युवा होने से पहले बुढ़ापा आ गया। घरवाले विवाह की चिन्ता में थे, मन बड़ा दुःखी और उदास रहता था, मैं जीवन से निराश था। कई बार मन में आता था कि विष खाकर सदा के लिए सो जाऊँ, रेल के आगे कटकर मर जाऊँ। इस जीने से तो मरना भी अच्छा है। गुण्डे विद्यार्थियों और नीच अध्यापक के चंगुल से निकलने का भी यत्न किया, किन्तु वे बड़े धूर्त थे-उनके जाल से निकलना कोई सहज बात थोड़ी ही थी। बार-बार यत्न करने पर भी उसी प्रकार दल-दल में फँसा रहा। ऐसे विकट समय में डूबते को तिनके का सहारा आर्यसमाज के एक सदाचारी उपदेशक का सत्संग मिला। उस सच्चे देवता ने मुझे बार-बार ब्रह्मचर्य और सदाचार की शिक्षा दी। ब्रह्मचर्य सम्बन्धी अनेक पुस्तकें उन्होंने दी और पढ़ाई। कई वर्ष लगातार घोर परिश्रम करके मुझे उन गुण्डों के चंगुल से निकाला। उनके सत्संग से मेरी सब कुटेब (बुराइयों) छूट गई। प्रतिदिन नियमित व्यायाम

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