ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश
Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh
स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंजीवन-सन्देश
है। जो कोई ब्रह्मचारी ऋतुगामी अर्थात् सन्तान पैदा करने के लिए वीर्यदान देने वाला, परस्त्री-त्यागी और एक स्त्रीवाला न हो तो वह भी बना बनाया धूल में मिल जावेगा। यदि आपके मूर्ख माता-पिता ने आपका बाल-विवाह कर दिया तो अपने आप को अविवाहित समझो। जब तक तुम २५ वर्ष के न हो जाओ गृहस्थ को विष समझो। नहीं तो तुम्हारा सर्वनाश हो जायेगा। तुम विद्या न पढ़ सकोगे, तुम्हारा शरीर भी बिगड़ जायेगा, पीछे पछताओगे और रोओगे। कोई आँसू भी पोछनेवाला नहीं मिलेगा। घर जाना भी पड़े तो बचकर रहो। बात तो तब है कि वे सैंकड़ों नवयुवक जिनके बाल-विवाह हो गये हों घरवालों के विरुद्ध सत्याग्रह करें, विवाह के बन्धन को तोड़ डालें और विवाह को विवाह न मानकर गृहस्थी न रहें। तब कहीं यह बाल-विवाह का पाप मिट सकेगा, नहीं तो रात-दिन इस देश के होनहार बालक इसी प्रकार मिट्टी में मिलते रहेंगे।
सगाई भी आधा विवाह है इसे भी २५ वर्ष की आयु से पूर्व स्वीकार नहीं करना चाहिए। सगाई के बहाने बालक को एक रुपया देकर ये धूर्त लोग अपने जाल में फँसा लेते हैं। सगाई करने वाले बड़ी मीठी-मीठी बातें करते हैं, इनके जाल में न फँसो।
विशेष जानकारी के लिए मेरी बनाई पुस्तक “बाल-विवाह से हानियाँ” पढ़ो।
निराश न हों।
बहुत से नवयुवक जिनका विवाह भी नही हुआ होता, किन्तु अज्ञानवश बाल्यकाल में कुसंगति में फँस अपना जीवन भ्रष्ट कर लेते हैं, उन्हें सत्संग से जब होश आता है बड़े हताश और दुःखी देखे जाते हैं। उन्हे घबराना नहीं चाहिए। जब आँख खुले, तभी प्रभात समझो। पिछली बातों को याद करके रोने-धोने में समय न खोओ। व्यर्थ चिन्ता करके अपनी चिता तैयार न करो। बीती को बिसार दो, रही को सँभालो। जब वाल्मीकि-सा डाकू महिर्ष बन सकता है, नास्तिक, शराबी तथा चरित्रहीन मुन्शीराम सच्चा साधु स्वामी श्रद्धानन्द सन्यासी अमर शहीद का पद पाता है, प्राचीन गुरुकुल शिक्षाप्रणाली का उद्धार कर हलचल मचाता है, थोड़ी-सी हड़्डियों
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