भारतकोश
ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh

स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 26 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 23

जीवन सन्देश | २२

ब्रह्मचर्य के बिना किसी भी राष्ट्र की उन्नति सम्भव नहीं है। जिस देश के युवक ब्रह्मचारी, वीर्यवान् और चरित्रवान् होंगे, वही देश संसार में सिरमौर बन सकता है। चरित्र ही मनुष्य का सच्चा धन है। यदि धन नष्ट हो गया तो कुछ नहीं गया, यदि स्वास्थ्य नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट हुआ, परन्तु यदि चरित्र नष्ट हो गया तो सब कुछ नष्ट हो गया।

अतः आओ, हम सब मिलकर यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने चरित्र की रक्षा करेंगे, ब्रह्मचर्य का व्रत धारण करेंगे और अपने देश तथा समाज का मस्तक ऊँचा करेंगे।

ओ३म् शान्तिः शान्तिः शान्तिः !


इति शुभम्