ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश
Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh
स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२१ | जीवन सन्देश
सकता। जो मनुष्य अपने मन को वश में कर लेता है, वह संसार के समस्त सुखों का उपभोग करने में समर्थ होता है।
मन की चंचलता को रोकने के लिये प्राणायाम, ईश्वर-प्रार्थना और स्वाध्याय परम आवश्यक साधन हैं। जब मन पवित्र और एकाग्र हो जाता है, तब विषय-वासनाएँ स्वतः ही शान्त हो जाती हैं।
युवकों को चाहिये कि वे गन्दे उपन्यासों, अश्लील चित्रों और सिनेमा के कुप्रभाव से दूर रहें। कुसंगति से सदा बचें, क्योंकि जैसी संगति होगी, वैसा ही रंग चढ़ेगा। शुद्ध, सात्विक और पौष्टिक भोजन करें। अधिक मिर्च-मसाले और उत्तेजक पदार्थों का त्याग करें। रात्रि को शीघ्र सोयें और प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भ्रमण व व्यायाम करें।
इस प्रकार के नियमबद्ध जीवन से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और ब्रह्मचर्य की रक्षा सहज ही हो जाती है।