भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 893 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 11

कृत्य-समुद्देश्य ] [ १५

प्रियव्रतस्य पुत्राणां कीर्त्यते यत्र विस्तरः । तेषां नियोगो द्वीपेषु देशेषु च पृथक् पृथक् ॥६६ स्वायंभुवस्य सर्गस्य ततश्चाप्यनुकीर्त्तनम् । वर्षाणां च नदीनां च तद्भेदानां च सर्वशः ॥६७ द्वीपभेदसहस्राणामन्तर्भावश्च सप्तसु । विस्तरान्मण्डलं चैव जंबूद्वीपसमुद्रयोः ॥६८ प्रमाणं योजनाग्रेण कीर्त्यते पर्वतैः सह । हिमवान्हेमकूटश्च निषधो मेरुरेव च । नीलः श्वेतश्च शृङ्गी च कीर्त्यन्ते सप्त पर्वताः ॥६९ तेषामन्तरविष्कंभा उच्छ्रायायामविस्तराः ॥७०

अद्भुत कर्मों वाले भगवान् रुद्र से दक्ष के प्रतिशाप का कथन है और दोष के दर्शन से वैर के प्रतिषेध का कीर्त्तन किया जाता है ।६४। मन्वन्तर के प्रसङ्ग से काल का भी आख्यान कहा जाता है प्रजापति कर्दम की कन्या का शुभ लक्षण बताया जाता है ।६५। जहाँ पर प्रियव्रत राजा के पुत्रों का विस्तार कीर्त्तित किया जाता है और द्वीपों में तथा देशों में पृथक्-पृथक् उनके नियोग का वर्णन है ।६६। इसके अनन्तर स्वायम्भुव मनु के सर्ग का वर्णन किया जाता है और सब वर्षों का नदियों का और समस्त उनके भेदों का अनुकीर्त्तन किया जाता है ।६७। फिर सहस्रों द्वीपों के भेदों का सात द्वीपों में ही अन्तर्भाव का वर्णन तथा जम्बू द्वीप और समुद्र के मण्डल का विस्तार से वर्णन किया जाता है ।६८। योजनों के अग्रभाग से पर्वतों के साथ प्रमाण का कीर्त्तन किया जाता है । इसके अनन्तर हिमवान्-हेमकूट-निषध-मेरु-नील श्वेत और शृङ्ग-इन सात पर्वतों का वर्णन किया जाता है ।६९। उनके अन्तर विष्कम्भ, उच्छ्राय, आयाम और विस्तार का वर्णन किया जाता है ।७०।

कीर्त्यन्ते योजनाग्रेण ये च तत्र निवासिनः । भारतादीनि वर्षाणि नदीभिः पर्वतैस्तथा ॥७१ भूतैश्चोपनिविष्टानि गतिमद्भिर्ध्रुवैस्तथा । जम्बूद्वीपादयो द्वीपाः समुद्रैः सप्तभिर्वृताः ॥७२