भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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पृष्ठ 184

१८८ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

सचिवैः सहितः श्रीमान् सवयोभिश्च राजभिः । महता बलभारेण नमयन्वसुधातलंम् ॥२३ नादयन् रथघोषेण ककुभः सर्वतो नृपः । स्वबलौघपदक्षेपप्रक्षुण्णावनिरेणुभिः ॥२४ ययौ संच्छादयन्व्योम विमानशतसंकुलम् । संप्रविश्य वनं घोरं विंध्याद्रेर्बलसंचयैः ॥२५ भृशं विलोलयामास समंताद्राजसत्तमः । परिवार्य वनं तत्तु स राजा निजसैनिकैः ॥२६ मृगान्रानाविधान्हिंस्रान्निजघान शितैः शरैः । आकर्णकृष्टकोदंडयोधमुक्तैः शितेषुभिः ॥२७ निकृत्तगात्राः शार्दूला न्यपतन्भुवि केचन । उदग्रवेगपादातखड्गखंडितविग्रहाः ॥२८

रथ-हाथी और अश्वों से समन्वित समस्त सैनिकों से युक्त होकर अपने पुरोहित के साथ वह राजा हैहयेश्वर अपने नगर से शिकार करने के लिए निकल दिया था ।२२। अपने सभी सचिवों के साथ और वयोवृद्ध अन्य कितने ही राजाओं को साथ में लेकर श्रीमान् वह बड़ी भारी सेना के वीरों के भार से समस्त वसुधा को नीचे की ओर झुकाते हुए वह चल रहा था ।२३। वह राजा अपनी सेना के रथों के चलने की ध्वनि से सभी दिशाओं को गुञ्जित कर रहा था और अपनी सेना के समुदायों के सहित प्रवेश करके सैकड़ों विमानों (वायुयानों) से आकाश को संछादित करता हुआ वह राजा था । उस राजेश्वर ने अपने सैनिकों के द्वारा उस सम्पूर्ण वन घेरकर परमश्रेष्ठ नृप वे उस स्थल को अत्यन्त विलोलित कर दिया था ।२५-२६। उस नृप ने अपने कानों तक समाकृष्ट धनुषों की प्रत्यञ्चा वाले योद्धाओं के द्वारा छोड़े हुए तीक्ष्ण बाणों से वहाँ पर अनेक प्रकार के हिंस्रक पशुओं का हनन किया था ।२७। अतीव उदग्र वेग से युक्त पदातियों के खड्गों से खण्डित शरीर वाले जिनके शरीर के भाग कट गये हैं ऐसे कुछ शार्दूल यहाँ पर भूमि में गिर गये थे ।२८।

वराहयूथपाः केचिद्रुधिरार्द्रा धरामगुः । प्रचंडशाक्तिकोन्मुक्तशक्तिनिर्भिन्नमस्तकाः ॥२९

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