संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभार्गव-चरित्र (३) ] [ ३०७
संग्राम में फेंका था ॥५॥ किन्तु भार्गवेन्द्र के द्वारा प्रक्षिप्त किये उस अस्त्र को महा बलवान् सोमदत्त ने काट दिया था और उसको अपने गरुड़ास्त्र से ही खण्डित कर दिया था। इसके अनन्तर महाभाग राम अत्यन्त क्रुद्ध हुए थे जो कि अपने शत्रुओं का विदारण करने वाले थे ॥६॥ इसके पश्चात् परशुराम ने भगवान रुद्र के द्वारा दिये हुए शूल में सोमदत्त का हनन कर दिया था—गदा से वृहदबल का और मुष्टि के प्रहार से विदर्भ का निपातन कर दिया था ।७।
मैथिलं मुद्गरेणैव शक्त्या च निषधाधिपम् ।
मागधं चरणाघातैरस्त्रजालेन सैनिकान् ॥८
निहत्य निखिलां सेनां संहाराग्निसमीरणे ।
दुद्राव कार्त्तवीर्यं च जामदग्न्यो महाबलः ॥६
दृष्ट्वा तं योद्धुमायांतं राजानोऽन्ये महारथाः ।
कार्याकार्यविधानज्ञाः पृष्ठे कृत्वा च हैहयम् ॥१०
रामेण युयुधुश्चैव दर्शयंतश्च सौहृदम् ।
कान्यकुब्जाश्च शतशः सौराष्ट्राऽवंतयस्तथा ॥११
चक्रुश्च शरजालानि रामस्य च समंततः ।
शरजालावृतस्तेषां रामः संग्राममूर्द्धनि ॥१२
न चादृश्यत राजेंद्र तदा स त्वकृतव्रणः ।
सस्मार रामचरितं यदुक्तं हरिणेन वै ॥१३
कुशलं भार्गवेंद्रस्य याचमानो हरिं मुनिः ।
एतस्मिन्नेव काले तु रामः शस्त्रास्त्रकोविदः ॥१४
राम ने मिथिला के नृप का हनन मुद्गर के द्वारा और शक्ति से निषध देश के नृप का वध तथा मगधदेशाधिपति का निपातन चरणों के आघातों से एवं उनके सब सैनिकों का वध अपने अनेक अस्त्रों के प्रहारों से कर दिया ।८। इस रीति से परशुरामजी ने वहाँ पर स्थित सम्पूर्ण सेना को मारकर महान् बलवान् जामदग्नि के पुत्र ने उस संहार की अग्नि के समीरण में राजा कार्त्तवीर्य पर दौड़कर आक्रमण किया था ।६। उस समय में महारथी अन्य राजाओं ने जो कि कार्य और अकार्य के विधान के ज्ञाता थे जब