भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 304, कुल 893 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 304

३०८ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

यह देखा कि परशुराम कार्तवीर्य से युद्ध करने के लिए आ रहे हैं तो उन सबने उस कार्तवीर्य को अपने पीठ पीछे कर दिया था।१०। और हैहय राजा के प्रति अपना सौहार्द दिखलाते हुए वे सब परशुराम के साथ युद्ध कर रहे थे। इन राजाओं में कान्य कुब्ज-सौराष्ट्र और सैकड़ों ही अवन्ति के नृप थे।११। इन सभी ने परशुराम पर सभी ओर अपने शरों के जालों की ऐसी घोर वर्षा की थी कि उस समय में परशुराम उनके बाणों से उस संग्राम भूमि में चारों ओर से ढक गये थे।१२। हे राजेन्द्र ! इस बाणों की वृष्टि से राम दिखाई नहीं दे रहे थे। तब उस अकृतव्रण ने उस श्रीराम के चरित का स्मरण किया था जो हरिण के द्वारा कहा गया था।१३। उस मुनि ने भगवान् श्रीहरि से भार्गवेन्द्र परशुराम के कुशल रहने की याचना की थी। इतने ही बीच में ऐसा हुआ कि समस्त शस्त्रों और अस्त्रों के महापण्डित परशुराम ने अपने महान् आयुधों का प्रयोग किया था।१४।

विधूय शरजालानि वायव्यास्त्रेण मंत्रवित् ।
उदतिष्ठद्रणाकांक्षी नीहारादिव भास्करः ॥१५॥
त्रिरात्रं समरे रामस्तैः सार्द्धं युयुधे बली ।
द्वादशाक्षौहिणीस्तत्र चिच्छेद लघुविक्रमः ॥१६॥
रम्भास्तम्भवनं यद्वत् परश्वधवरायुधः ।
सर्वांस्तान्नृपवर्गांश्च तदीयाश्च महाचमूः ॥१७॥
दृष्ट्वा विनिहतां तेन रामेण सुमहात्मना ।
आजगाम महावीर्यः सुचन्द्रः सूर्यवंशजः ॥१८॥
लक्षराजन्यसंयुक्तः सप्ताक्षौहिणिसंयुतः ।
तत्रानेकमहावीरा गर्जंतस्तोयदा इव ॥१९॥
कंपयंतो भुवं राजन् युयुधुर्भार्गवेण च ।
तैः प्रयुक्तानि शस्त्राणि महास्त्राणि च भूपते ॥२०॥
क्षणेन नाशयामास भार्गवेन्द्रः प्रतापवान् ।
गृहीत्वा परशुं दिव्यं कालांतकयमोपमम् ॥२१॥

मन्त्रों के परमज्ञाता राम ने अपने अस्त्र के द्वारा समस्त शरों के समुदाय को दूर करके कुहरे से निकले हुए भगवान् सूर्य देवकी भांति वहां