संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 341, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ेंभार्गव-चरित्र वर्णन (२) ] [ ३४५
नामान्यस्योपदिष्टानि सुपुण्यानि महात्मभिः । यानि तानि प्रवक्ष्यामि निखिलाघहराणि च ॥३२ प्रमथानां गणा ये च नानारूपा महाबलाः । तेषामीशस्त्वयं यस्माद्गणेशस्तेन कीर्त्तितः ॥३३ भूतानि च भविष्याणि वर्त्तमानानि यानि च । ब्रह्मांडान्यखिलान्येव यस्मिँल्लंबोदरः स तु ॥३४ यः स्थिरो देवयोगेन च्छिन्नं संयोजितं पुनः । गजस्य शिरसा देवि तेन प्रोक्तो गजाननः ॥३५
हे शम्भु के साथ बिहार करने वाली देवि ! आप तो समस्त सांसारिक भयों को दूर करने वाली हैं और सभी प्रकार के कल्मषों का विनाश कर देने वाली हैं। हे कुम्भिगते ! अर्थात् मत्तकरिणी के समान मन्द गति वाली ! यह परशुराम अब आपके चरणों में पड़ा हुआ आप को प्रणिपात कर रहा है। यद्यपि इसने निरन्तर आपके अपराध रूपी पाप किया है तथापि इसको क्षमा करके अब वरदान दे दीजिए ।२६। हे देवि ! आप तो महान् भाग वाली हैं। अब आप मेरे वेदों में कहे हुए वचन का श्रवण कीजिए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उस मेरे वचन को सुनकर आप निश्चय ही परम हर्षित हो जायगी। इसमें लेशमात्र भी संशय नहीं है। यह विनायक (गणेश) आपका पुत्र है और यह महान् आत्मा वाले तथा महान् पुरुषों में भी शिरोमणि महान् पुरुषों में भी शिरोमणि महान् हैं ।३०। इनके हृदय में कभी भी काम-क्रोध-उद्वेग और भय आदि का प्रवेश नहीं हुआ करता है। हे भामिनि ! वेदों में स्मृतियों में पुराणों में तथा संहिताओं में सर्वत्र इनके शुभमानों का वर्णन है ।३१। बड़े-बड़े महात्माओं के द्वारा सुपुण्यमय इनके नामों का उपदेश दिया गया है। वे इनके परम शुभ नाम समस्त अघों के दूर कर देने वाले हैं। जो भी वे नाम हैं उनको मैं अभी आपको बतला दूँगा ।३२। जो भी प्रमथों के गण हैं जिनके विविध स्वरूप हैं और जो महान् बल वाले हैं। उन सबके यह गणेश स्वामी हैं। यही कारण है कि इनका नाम 'गणेश' यह संसार में कहा जाया करता है ।३३। जितने भी जो भी भविष्य में होने वाले हैं और समस्त जो भी ब्रह्माण्ड हैं जिनमें यहीं लम्बोदर हैं अर्थात् लम्बे विशाल उदर वाले यही हैं ।३४। जो भी इस समय में स्थिर है यह पहिले एक बार देव के योग से इनका मस्तक छिन्न हो गया