भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 345, कुल 893 में से

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पृष्ठ 345

भार्गव-चरित्र वर्णन (३) ] [ ३४६

हे महाभागे ! यह वैष्णव परशुराम शैवता को प्राप्त हुआ है अर्थात् शिव के स्वरूप को प्राप्त हो जाने वाला हो गया है । और साक्षात् यह गणेश शिव हैं जो वैष्णवत्व को प्राप्त हुआ है अर्थात् विष्णु के स्वरूप में समास्थित है । इन हम दोनों प्रभुओं का भी भेद दिखलाई नहीं दिया करता है । इस प्रकार से कहकर श्री राधा ने अपनी गोद में गजानन को बैठा लिया था ।५०-५१। फिर गणेशजी का मस्तक सूँघ कर अपने हाथ से उनके कपोलों का स्पर्श किया था । उनके केवल कर कमल के स्पर्श करते ही तत्क्षण जो भी दाँत के टूट जाने से क्षत हो गया था वह भरकर ठीक हो गया था ।५२। इसके अनन्तर श्री राधा जी के द्वारा अनुनय की गयी पार्वतीजी भी परम प्रसन्न हो गयी थीं और अपने चरणों में मस्तक नवाकर पड़े हुए परशुराम को उन्होंने भी अपने करकमल से पकड़ कर उठा लिया था । पार्वती जी ने परम प्रसन्न होकर उसको अपनी गोद में बिठाकर उसके शिर का उपघ्राण किया था । आर्य संस्कृति में वृद्ध एवं बड़े लोग अपने छोटे बालकों का शिर सूँघ कर उनकी आयु की वृद्धि किया करते थे । इस रीति से उन दोनों राम और गणेश का सत्कार भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने नेत्रों से देखा था । तब श्रीकृष्ण ने भी स्कन्द को अपनी ओर उठाकर बहुत ही प्रेम के साथ अपनी गोद में बैठा लिया था । इसके अनन्तर भगवान् शम्भु ने भी परम प्रसन्न होकर वहाँ पर समुपस्थित श्रीदामा को अपनी गोद में संस्थापित कर लिया था और मान प्रदान करने वाले प्रभु ने उसका बड़ा सत्कार किया था ।५३-५४-५५-५६।

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भार्गव-चरित्र वर्णन (३)

वसिष्ठ उवाच—
एवं सुस्निग्धचित्तेषु तेषु तिष्ठत्सु भूपते ।
भवान्युत्सङ्गतो रामः समुत्थाय कृतांजलिः ॥१
तुष्टाव प्रयतो भूत्वा निर्विशेषं विशेषवत् ।
अद्वयं द्वैतमापन्नं निर्गुणं सगुणात्मकम् ॥२

राम उवाच—
प्रकृतिविकृतिजातं विश्वमेतद्विधातुं मम कियदनुभातं
वैभवं तत्प्रमातुम् ।

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