संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभार्गव-चरित्र वर्णन (३) | [ ३५१
भी आपका वैभव है उसके जानने के लिये मेरा ज्ञान कितना है अर्थात् मैं बहुत ही तुच्छ ज्ञान वाला उसको नहीं जान सकता हूँ। आपका स्वरूप और नाम किसी को भी विदित नहीं हैं किन्तु फिर भी आप अभीष्ट वस्तुओं के एक ही धाम हैं। आप भगवान् शङ्कर की भामिनी हैं और पूर्ण काम वाली हैं। आप मेरी रक्षा कीजिए। ३। सत्त्व-रज और तम-इन गुणों का ज्ञान करने वाला—काल की सख्या का विधान करने वाला—इस सम्पूर्ण संसार का जो मूल कारण है वह प्रधान-इस नाम से कीर्त्तित किया जाया करता है वह यहाँ पर पूर्णतया कृतकृतक निपात वाला उत्कपात जिससे हुआ था हे माता ! वह आप आज मेरा परित्राण कीजिए ।४। सम्पूर्ण दनुओं के कुलों का विनाश करने वाले—लेख पातों में अविनाशी-अपने कुल का सर्वप्रथम विकास करने वाले—समस्त विद्याओं के प्रकाश से समन्वित-अपने बल से ही काशी की रचना के कर्त्ता-अपने भक्तों के लिए सभी प्रकार का आशीर्वाद देने वाले और जिन्होंने पाश को भी जीत लिया है ऐसे षण्मुखों से अशन करने वाले स्वामी कार्त्तिकेय मेरी सदा-सर्वदा रक्षा करें ।५। भगवान् हर के समीप में निवास करने वाले—श्रीकृष्ण की सेवा के विलास वाले-जो भक्त चरणों में प्रणत होते हैं उनको विशेष ज्ञान प्रदान करने वाले-गोपों की कन्याओं के द्वारा प्रहास किये गये-भगवान् शङ्कर जिनका बड़ा मान दिया करते हैं गोपिकेश्वर के एक ध्यान वाले और जिनको बहुत से विधान ज्ञान हैं वे मेरे कीर्त्तिहा होवे ।६। जो प्रभु के चरणों में नियत मन वाले हैं तथा भक्तों के अन्तःकरण में प्रेरणा प्रदान करने वाले-समस्त पापों के समुदाय का हरण करने वाले-ज्ञान के प्रदान में तत्पर-सब प्रकार के गुणगणों में परमश्रेष्ठ और श्री राधाकाजी को गोद में विराजमान प्रभु मेरे किये हुए अगाध अपराध को क्षमा करने के योग्य होते हैं ।७।
या राधा जगदुद्भवस्थितिलयेष्वाराध्यते वा जनैः
शब्दं बोधयतीशवक्त्रं विगलत्प्रेमामृतास्वादनम् ।
रासेशी रसिकेश्वरी रमणहृन्निष्ठानिर्जानंदिनी
नेत्री सा परिपातु मामवनतं राधेति या कीर्त्यते ॥८
यस्या गर्भसमुद्भवो ह्यतिविराडद्यस्यांशभूतो विराड्
यन्नाभ्यंबुरुहोद्भवेन विधिनाैकांतोपदिष्टेन वै
सृष्टं सर्व्वमिदं चराचरमयं विश्वं च यद्रोमसु
ब्रह्मांडानि विभांति तस्य जननी शश्वत्प्रसन्नाऽस्तु सा ॥९