संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७० ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
रामेण योद्धुं सहिता राजभिश्चक्रुरुद्यमम् ॥१७ चतुरङ्गबलोपेतास्ततस्ते क्षत्रियर्षभाः । राममासादयामासुः पतंगा इव पावकम् ॥१८ निवार्य तानापतितो रथेनैकेन भार्गवः । युयुधे पार्थिवैः सर्वैः समरेऽमितविक्रमः ॥१९ ततः पुनरभूद्युद्धं रामस्य सह राजभिः । जघान यत्र संक्रुद्धो राज्ञां शतमुदारधीः ॥२० ततः स सूरसेनादीन्हत्वा सबलवाहनान् । क्षणेन पातयामास क्षितौ क्षत्रियमंडलम् ॥२१
अपने माता और पिता दोनों के वध हो जाने से परशुरामजी को बड़ा भारी क्रोध हो गया था। जब परम क्रुद्ध भार्गव के रथ प्रत्यञ्चा और शंख के नाद हुए तो इनसे उस नृप की समस्त नगरी और नर तथा द्विप सभी अत्यन्त संक्षुब्ध हो गये थे। १५। उन नृप के पुत्रों ने जब यह समझ लिया था कि सब क्षत्रियों के कुलों का अन्त कर देने वाले परशुराम समा-गत हो गये हैं तो वे बहुत ही क्षुब्ध हुए थे और फिर उन्होंने राम के साथ संग्राम करने के लिए उद्योग किया था। १६। इसके अनन्तर हे नृप ! पञ्च-रथ शूरसेन प्रभृति शूरों ने अनेक अन्य राजाओं के साथ परशुरामजी युद्ध करने के लिए उद्यम किया था। १७। इसके उपरान्त वे श्रेष्ठ क्षत्रिय अपनी चतुरङ्गिणी सेनाओं से समन्वित हुए थे और सब राम के पास प्राप्त हो गये थे। जिस तरह पावक पर गिरने वाले पतङ्गों को अग्नि भस्मसात् करके निवारित कर दिया करता है उसी भाँति भार्गवेन्द्र ने अपने एक ही रथ के द्वारा उस पर संस्थित होकर अपने ऊपर चारों ओर से आक्रमण करके आपतन करने वालों को निवारित कर दिया था। अपरिमित बल-विक्रम से सुसम्पन्न राम ने समराङ्गण में उन सभी नृपों के साथ घोर युद्ध किया था। १८-१९। इसके अनन्तर फिर भार्गव का युद्ध राजाओं के साथ हुआ था और उस उदार बुद्धि वाले परशुराम ने उन सौ राजाओं का वध कर दिया था। २०। फिर शूरसेन आदि नृपों का सेना और वाहनों के सहित हनन करके एक ही क्षण में उस पूर्ण क्षत्रियों के मण्डल को भूमि पर गिरा दिया था। २१।