भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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सगर-प्रतिज्ञा पालन ] [ ३६३

आक्रमण किया था। फिर उन सबके साथ जो पूर्णतया रथों और हाथियों से संयुत थे इसका महान् युद्ध हुआ था। १३। उन हैहय वीरों के साथ उसका बड़ा ही रोमाञ्चकारी भीषण युद्ध हुआ था जिस युद्ध में सहस्रों राजा थे और बड़ी विशाल सेनाएं भी थीं। १४।

निजघान महाबाहुः संक्रुद्धः कोसलेश्वरः ।
जित्वा हैहयभूपालान्भंक्त्वा दग्ध्वा च तत्पुरीम् ॥१५
निःशेषशून्यामकरोद्वैरांतकरणो नृपः ।
समग्रबलसंमर्द्दप्रमृष्टाशेषभूतलः ॥१६
हैहयानामशेषं तु चक्रे राज्यं रजः समम् ।
राज्यं पुरीं चापहाय भ्रष्टैश्वर्या हतत्विषः ॥१७
राजानो हतभूयिष्ठा व्यद्रवंत समंततः ।
अभिद्रुत्य नृपांस्तांस्तु द्रवमाणान्महीपतिः ॥१८
जघान सानुगान्मत्तः प्रजाः क्रुद्ध इवांतकः ।
ततस्तान्प्रति सक्रोधः सगरः समरेऽरिहा ॥१९
मुमोचास्त्रं महारौद्रं भार्गवं रिपुभीषणम् ।
तेनोत्सृष्टातिरोद्रत्रिभुवनभयदप्रस्फुरद्भागैवास्त्र-
ज्वालादंदह्यमानावशतनुततयस्ते नृपाः सद्य एव ।
वाय्वस्त्रावृत्तधूमोगमपटलतमोमुष्टदृष्टिप्रसारा
भ्रेमुर्भू पृष्ठलोठद्वहुलतमरजो गूढमात्रा मुहूर्त्त म् ॥२०
आग्नेयास्त्रप्रतापप्रतिहतगतयोऽदृष्टमार्गाः समंता-
द्भूपाला नष्टसंघाः परवशतनवो व्याकुलीभूतचित्ताः ।
भीताः संत्युक्तवस्त्रायुधकवचविभूषादिका मुक्तकेशा
विस्पष्टोन्मत्तभावानृशतरमनुकुर्वत्यग्रतः
शात्रवाणाम् ॥२१

उन सभी का निहनन महान् बाहुओं वाले कोसलेश्वर ने अत्यन्त क्रुद्ध होकर कर दिया था। फिर हैहय नृपों को जीतकर उनकी पुरी को तोड़-कर दग्ध कर दिया था। १५। वैर के अन्त करने वाले नृप ने उनकी पुरी