भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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गंगा का पृथ्वी पर आगमन ] [ ५५

करने का उन्होंने उपक्रम किया था। राजा ने कहा-जब अगस्त्य मुनि ने समुद्र के जल का पान कर लिया था और सभी ओर सगर पुत्रों ने उसका खनन किया था तथा सभी तीर्थ-क्षेत्र और कानन नीचे की ओर गिरा दिये गये थे और अन्य पुरग्राम तथा आकर आदि भू भाग एवं देश विनाborder: नाशित हो गये थे जो भी समुद्र के समीप में विद्यमान थे हे मुनिश्रेष्ठ ! वहाँ पर पतरों वाले मनुष्यों ने फिर क्या किया था ? ।२३-२५। वे सब वहीं पर बस गये थे अथवा बड़ी कठिनाई से कहीं अन्य स्थलों में प्रस्थान कर गये थे ? फिर कितने समय में यह समुद्र परिपूर्ण हो गया था ? हे ब्रह्मन् ! यह किस प्रकार से सब हुआ था-यह आप अब कृपया मुझे बतलाइये ।२६। जैमिनि मुनि ने कहा--जब दुरात्माओं के द्वारा सभी अनूप प्रदेश नष्ट कर दिये गये थे तब वहाँ पर रहने वाले सभी जन इधर-उधर प्रयाण कर गये थे। कुछ क्षेत्र के निवासी बड़ी कठिनाई से वहीं पर निवास करने लगे थे ।२७-२८।

एतस्मिन्नेव काले तु राजन्नंशुमतः सुतः ।
बभूव भुवि धर्मात्मा दिलीप इति विश्रुतः ॥२९
राज्येऽभिषिच्य तं सम्यग्भुक्तभोगोऽशुमान्नृपः ।
वनं जगाम मेधावी तपसे धृतमानसः ॥३०
दिलीपस्तु ततः श्रीमानशेषां पृथिवीमिमाम् ।
पालयामास धर्मेण विजित्य सकलानरीन् ॥३१
भगीरथो नाम सुतस्तस्यासील्लोकविश्रुतः ।
सर्वधर्मार्थकुशलः श्रीमानमितविक्रमः ॥३२
राज्येऽभिषिच्य तं राजा दिलीपोऽपि वनं ययौ ।
स चापि पालयन्नुर्वी सम्यग्विहतकंटकाम् ॥३३
मुमुदे विविधैर्भोगैर्दिवि देवपतिर्यथा ।
स शुश्रावात्मनः पूर्वं पूर्वजानां महीपतिः ॥३४
निरये पतनं घोरं विप्रकोपसमुद्भवम् ।
ब्रह्मदंडहतान्सर्वान्पितॄञ्छ्रुत्वाऽतिदुःखितः ॥३५

इसी समय में हे राजन् ! अंशुमान का सुत परम धर्मात्मा दिलीप —इस नाम से प्रसिद्ध हुआ था। अर्थात् दिलीप ने भूमि में जन्म ग्रहण

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