संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 474, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ेंगान्धर्व मूर्छना लक्षण ] [ ६१
के कारूष क्षत्रिय हुए थे जो युद्ध करने में दुर्मद थे ।१-२। यह एक सहस्र क्षत्रियों का समुदाय था जो बहुत ही अधिक विक्रान्त हुआ था दिष्ट पुत्र नाभाग था और भलन्दन विद्वान था ।३। इस भलन्दन का पुत्र महान् बल-वान् प्रांशु नाम वाला हुआ था। प्रांशु का एक ही पुत्र हुआ था जो नृप प्रजापति के ही समान था ।४। उसको सुहृत् और बान्धवों के साथ संवर्त्त के द्वारा स्वर्ग में ले जाया गया था। इस विषय में संवर्त्त का और वृहस्पति का बड़ा भारी विवाद हुआ था ।५। उसके यज्ञ की ऋद्धि का अवलोकन करके वृहस्पति क्रुद्ध हो गये थे। संवर्त्त के द्वारा यज्ञ के विस्तृत होने पर उस समय में वह अत्यधिक कुपित हो गया था ।६। लोकों के विनाश करने के लिए देवगणों के द्वारा वह प्रसन्न किया था। मरुत चक्रवर्त्ती उसने नरिष्यन्त को बसाया था ।७।
नरिष्यंतस्य दायादो राजा दंडधरो दमः ।
तस्य पुत्रस्तु विज्ञातो राजाऽसीद्राष्ट्रवर्द्धनः ॥८
सुधृतिस्तस्य पुत्रस्तु नरः सुधृतितः पुनः ।
केवलस्य पुत्रस्तु बंधुमान्केवलात्मजः ॥९
अथ बंधुमतः पुत्रो धर्मात्मा वेगवान्नृप ।
बुधो वेगवतः पुत्रस्तृणबिंदुर्बुधात्मजः ॥१०
त्रेतायुगमुखे राजा तृतीये संबभूव ह ।
कन्या तु तस्येडविडा माता विश्रवसो हि सा ॥११
पुत्रो योऽस्य विशालोऽभूद्राजा परमधार्मिकः ।
दाश्वान्प्रख्यातवीर्य्योऽजा विशाला येन निर्मिता ॥१२
विशालस्य सुतो राजा हेमचन्द्रो महाबलः ।
सुचन्द्र इति विख्यातो हेमचन्द्रादनन्तरः ॥१३
सुचन्द्रतनयो राजा धूम्राश्व इति विश्रुतः ।
धूम्राश्वतनयो विद्वान्सृंजयः समपद्यत ॥१४
नरिष्यन्त का दायाद दण्डधर राजा दम था। उसका पुत्र परम विद्वान राष्ट्र वर्धन राजा हुआ था ।८। उसका पुत्र सुधृति हुआ था और फिर सुधृति से नर पुत्र ने जन्म ग्रहण किया था। केवल का पुत्र तो एक