संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
केवलात्मज बन्धुमान् हुआ था ।९। हे नृप ! फिर बन्धुमान् के यहाँ धर्मात्मा वेगवान् ने पुत्र के रूप में जन्म धारण किया था। वेगवान् का पुत्र बुध हुआ था और बुध का पुत्र तृण बन्धु उत्पन्न हुआ था ।१०। तृतीय त्रेता के मुख में राजा हुआ था। उसकी कन्या इडविडा थी जो विश्रवा की माता थी ।११। इसका पुत्र विशाल राजा हुआ था जो परम धार्मिक था। यह दाश्वान् और प्रख्यात वीर्य तथा ओज वाला था जिसने विशाल का निर्माण किया था ।१२। इस विशाल का पुत्र महाबलवान् हेमचन्द्र उत्पन्न हुआ था। इस हेमचन्द्र के अनन्तर सुचन्द्र नाम वाला विख्यात हुआ था ।१३। सुचन्द्र का पुत्र राजा धूम्राश्व हुआ था जो प्रसिद्ध था और धूम्राश्व का पुत्र परम विद्वान् सृंजय हुआ था ।१४।
सृञ्जयस्य सुतः श्रीमान्सहदेवः प्रतापवान् ।
कृशाश्वः सहदेवस्य पुत्रः परमधार्मिकः ॥१५
कृशाश्वस्य महातेजा सोमदत्तः प्रतापवान् ।
सोमदत्तस्य राजर्षेः सुतोऽभूज्जनमेजयः ॥१६
जनमेजयात्मजश्चैव प्रमतिर्नाम विश्रुतः ।
तृणबिंदुप्रभावेण सर्वे विशालका नृपाः ॥१७
दीर्घायुषो महात्मानो वीर्यवन्तः सुधार्मिकाः ।
शर्यातेर्मिथुनं त्वासीदानर्त्तो नाम विश्रुतः ॥१८
पुत्रः सुकन्या कन्या च भार्या या च्यवनस्य च ।
आनर्त्तस्य तु दायादो रेवो नाम सुवीर्यवान् ॥१९
आनर्त्तविषयो यस्य पुरी चापि कुशस्थली ।
रेवस्य रेवतः पुत्रः ककुद्मी नाम धार्मिकः ॥२०
ज्येष्ठो भ्रातृशतस्यासीद्राज्यं प्राप्य कुशस्थलीम् ।
कन्यया सह श्रुत्वा च गांधर्वं ब्रह्मणोऽन्तिके ॥२१
इस सृंजय का जो पुत्र समुत्पन्न हुआ था वह श्री सम्पन्न और प्रताप वाला सहदेव था। सहदेव के पुत्र का नाम कृशाश्व था। यह भी परम धार्मिक हुआ था ।१५। कृशाश्व का तनय सोमदत्त हुआ था जो महान तेज वाला था और परम प्रतापी था। राजर्षि सोमदत्त के यहां जनमेजय ने पुत्र