संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 547, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माणवतं वर्णन ] [ १३७
जी ने प्राप्त किया था । बृहस्पति ने फिर सविता को बताया था ।५६। सविता ने मृत्यु को दिया था और मृत्यु ने फिर इन्द्र को दिया था । इन्द्र ने वसिष्ठ मुनि को बताया था और वसिष्ठजी सारस्वत को दिया था ।५९-६०। सारस्वत ने त्रिधामा को दिया था और त्रिधामा ने शरद्वान् को दिया था । शरद्वान् ने त्रिविष्ट को दिया और उसने अन्तरिक्ष को दिया था ।६१। अन्तरिक्ष ने चर्ची को बतलाया और उसने त्रय्यारुण को दिया था । त्रय्यारुण ने धनञ्जय को दिया था उसने कृतञ्जय को दिया था ।६२। कृतञ्जय से तृणञ्जय को मिला था और इससे भरद्वाज को प्राप्त हुआ था । भरद्वाज ने गौतम को दिया था ओर उसने फिर नियंन्तर को दिया था ।६३।
नियन्तरस्तु प्रोवाच तथा वाजश्रवाय वै ।
स ददौ सोमशुष्माय स चादात्तृणबिन्दवे ॥६४
तृणबिन्दुस्तु दक्षाय दक्षः प्रोवाच शक्तये ।
शक्तेः पराशरश्चापि गर्भस्थः श्रुतवानिदम् ॥६५
पराशराज्जातुकर्ण्यस्तस्माद्द्वैपायनः प्रभुः ।
द्वैपायनात्पुनश्चापि मया प्राप्तं द्विजोत्तम ॥६६
मया चैतत्पुनः प्रोक्तं पुत्रायामितबुद्धये ।
इत्येव वाक्यं ब्रह्मादिकगुरूणां समुदाहृतम् ॥६७
नमस्कार्याश्च गुरवः प्रयत्नेन मनीषिभिः ।
धन्यं यशस्यमायुष्यं पुण्यं सर्वार्थसाधकम् ॥६८
पापघ्नं नियमेनेदं श्रोतव्यं ब्राह्मणैः सदा ।
नाशुचौ नापि पापाय नाप्यसंवत्सरोषिते ॥६९
नाश्रद्दधानेऽविदुषे नापुत्राय कथंचन ।
नाहिताय प्रदातव्यं पवित्रमिदमुत्तमम् ॥७०
नियन्तर ने वाजश्रव को यह बताया था ओर उसने सोम शुष्म को दिया था फिर उसने तृण बिन्दु के लिए दिया था ।६४। तृण बिन्दु ने दक्ष को दिया था ओर उसने फिर शक्ति को बताया था । शक्ति से गर्भ में ही स्थित पराशर मुनि ने इसका श्रवण किया था ।६५। पराशर से जातुकर्ण्य ने प्राप्त किया था फिर उससे प्रभु द्वैपायन ने प्राप्त किया था । हे द्विजोत्तम !