संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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सब पर शासन करने लगा था ।८७। हे मुने ! इसके अनन्तर उस महान बली भण्डासुर का हनन करने के लिए तथा तीनों लोकों की संरक्षा करने के वास्ते महायाग की अग्नि से एक तीसरा ही स्वरूप समुद्भूत हुआ था ।८८। जिस स्वरूप के धारण करने वाली को ललिता नाम से लोग कहा करते थे जो पर देवता थी । उसके चारों करों में पाश—अंकुश—धनुष और बाण ये आयुध थे ।८६। वह देवी परमाधिक शक्ति वाली थी और वह साक्षात् पर-ब्रह्म के स्वरूप वाली थी । युद्ध करने में महा विशारद उसने उस भण्ड दैत्येन्द्र को युद्ध में मार गिराया था ।६०।
भण्डासुर प्रादुर्भाव वर्णन
अगस्त्य उवाच-
कथं भंडासुरो जातः कथं वा त्रिपुरांबिका ।
कथं बभंज तं संख्ये तत्सर्वं वद विस्तरात् ॥१
हयग्रीव उवाच
पुरा दाक्षायणीं त्यक्त्वा पितुर्यज्ञविनाशनम् ॥२
आत्मानमात्मना पश्यञ्ज्ञानानन्दसात्मकः ।
उपास्यमानो मुनिभिरद्वन्द्वगुणलक्षणः ॥३
गङ्गाकूले हिमवतः पर्यन्ते प्रविवेश ह ।
सापि शङ्करमाराध्य चिरकालं मनस्विनी ॥४
योगेन स्वां तनुं त्यक्त्वा सुतासीद्धिमभूभृतः ॥५
स शैलो नारदाच्छ्रुत्वा रुद्राणीति स्वकन्यकाम् ।
तस्य शुश्रूषणार्थाय स्थापयामास चांतिके ॥६
एतस्मिन्नन्तरे देवास्तारकेण हि पीडिताः ।
ब्रह्मणोक्ताः समाहूय मदनं चेदमब्रुवन् ॥७
अगस्त्य मुनि ने कहा—यह भण्डासुर कैसे समुत्पन्न हुआ था अथवा यह त्रिपुराम्बिका देवी कैसे प्रादुर्भूत हुई थी । उसने समरांगण में उस महा-दैत्य को कैसे मारा था—यह सम्पूर्ण वृत्त मेरे सामने विस्तार के साथ वर्णन