संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमदन कामेश्वर प्रादुर्भाव वर्णन ] [ २११
आजगाम ततो विष्णुरासढो विनतासुतम् ।
शिवोऽपि वृषमारूढः समायातोऽखिलेश्वरीम् ॥२
देवर्षयो नारदाद्याः समाजग्मुर्महेश्वरीम् ।
आययुस्तां महादेवीं सर्वे चाप्सरसां गणाः ॥३
विश्वावसुप्रभृतयो गन्धर्वाश्चैव यक्षकाः ।
ब्रह्मणाथ समादिष्टो विश्वकर्मा विशांपतिः ॥४
चकार नगरं दिव्यं यथामरपुरं तथा ।
ततो भगवती दुर्गा सर्वमन्त्राधिदेवता ॥५
विद्याधिदेवता श्यामा समाजग्मतुरंबिकाम् ।
ब्राह्मयाद्या मातरश्चैव स्वस्वभूतगणावृताः ॥६
सिद्धयो ह्यणिमाद्याश्च योगिन्यश्चैव कोटिशः ।
भैरवाः क्षेत्रपालाश्च महाशास्ता गणाग्रणीः ॥७
हयग्रीव ने कहा—इसी समय में लोकों के पितामह—ब्रह्माजी उस देवेशी के दर्शन करने की इच्छा वाले महर्षियों के साथ वहाँ पर समागत हो गये थे । इसके पश्चात् भगवान् विष्णु भी गरुड़ पर समारूढ़ होकर वहाँ पर आ गये थे । भगवान् शिव भी वृष पर सवार होकर अखिलेश्वरी के दर्शनार्थ आ गये थे ।१-२। नारद आदि देवर्षिगण महेश्वरी के समीप में समागत हो गये थे । सभी अप्सराओं के समुदाय भी महादेवी के दर्शनार्थ आ गये थे ।३। विश्वावसु आदि गन्धर्व और यक्ष भी वहाँ पर आये थे । ब्रह्माजी के द्वारा आदेश पाकर विशांपति विश्वकर्मा ने एक दिव्य नगर की रचना की थी जैसा कि साक्षात् अमर पुर ही होवे । इसके पश्चात् सब मन्त्रों की अधिदेवता श्यामा ये सब अम्बिका के समीप में समागत हुए थे । ब्राह्मी आदि समस्त मातृगण अपने-अपने भूतगणों के साथ समावृत होकर वहाँ पर आयीं थीं ।४-६। अणिमा-महिमा आदि आठ सिद्धियाँ और करोड़ों योगिनियों वहाँ पर आ गयी थीं । भैरव और क्षेत्रपाल-महाशास्ता गणों के अग्रणी वहाँ समागत हुए ।७।
महागणेश्वरः स्कन्दो वटुको वीरभद्रकः ।
आगत्य ते महादेवीं तुष्टुवुः प्रणतास्तदा ॥८