भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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चक्ररथ पर्वस्थ देवता नाम प्रकाशन ] [ २४३

॥ चक्ररथ पर्वस्थ देवता नाम प्रकाशन ॥

अगस्त्य उवाच- चक्रराजस्थैस्य याः पर्वेणि समाश्रिताः । देवता प्रकटाभिख्यास्तासामाख्यां निवेदय ॥१ संख्याश्च तासामखिला वर्णभेदांश्च शोभनान् । आयुधानि च दिव्यानि कथयस्व हयानन ॥२

हयग्रीव उवाच- नवमं पर्व दीप्तस्य रथस्य समुपस्थिताः । दश प्रोक्ता सिद्धिदेव्यस्तासां नामानि मच्छृणु ॥३ अणिमा महिमा चैव लघिमा गरिमा तथा । ईशिता वशिता चैव प्राप्तिः सिद्धिश्च सप्तमी ॥४ प्राकाम्यमुक्तिसिद्धिश्च सर्वकामाभिधापरा । एता देव्यश्चतुर्वाह्वचो जपाकुसुमसंनिभाः ॥५ चिंतामणिकपालं च त्रिशूलं सिद्धिकज्जलम् । दधाना दयया पूर्णा योगिभिश्च निषेविताः ॥६ तत्र पूर्वार्द्धभागे च ब्रह्माद्या अष्ट शक्तयः । ब्राह्मी माहेश्वरी चैव कौमारी वैष्णवी तथा । वाराही चैव माहेन्द्री चामुण्डा चैव सप्तमी ॥७

श्री अगस्त्य जी ने कहा—जो देवता पर्व में चक्रराज रथेन्द्र के समाश्रित थे जिनका जो नाम प्रकट था उनका आख्यान कृपाकर बतलाइए ।१। हेहयानन ! उन सब देवों की संख्या और उनके परम शोभन वर्णों के भेद तथा उनके दिव्य आयुध यह सभी वर्णन कीजिए ।२। हयग्रीव जी ने कहा—उस दीप्त रथ के नवम पर्व में समुपस्थित ये दश सिद्धि देवियाँ कही गयी हैं । उनके नाम भी आप मुझसे श्रवण कीजिए ।३। अणिमा-लघिमा-गरिमा-ईशिता-वशिता-सातवीं प्राप्ति सिद्धि होती है । आठवी प्राकाम्य सिद्धि होती है जो सर्वकांता नाम वाली होती है । ये आठों देवियां चार-