भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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चक्ररथ पर्वस्थ देवता नाम प्रकाशन ] । २५१

द्रुती च त्वरिता देवी नवमी कुलसुन्दरी ॥५८
नित्या नीलपताका च विजया सर्वमंगला ।
ज्वालामालिनिकाचित्रे दश पंच च कीर्तिताः ॥५९
एताभिः सहिता देवी सदा सेवकबुद्धिभिः ।
दुष्टं भंडासुरं जेतुं निर्ययौ परमेश्वरी ॥६०
मन्त्रिनाथा महाचक्रे गीति चक्रे रथोत्तमे ।
सप्तपर्वाणि चोक्तानि तत्र देव्याश्च ताः शृणु ॥६१
गेयचक्ररथे पर्वमध्यपीठनिकेतना ।
संगीतयोगिनी प्रोक्ता श्रीदेव्या अतिवल्लभा ॥६२
तदेव प्रथमं पर्व मन्त्रिण्यास्तु निवासभूः ।
अथ द्वितीयपर्वस्था गेयचक्रे रथोत्तमे ॥६३

हे कुम्भज ! अब उनके शुभ नाम भी मुझ से आप अवधारित कर लीजिए । कामेशी-भगमाला-नित्य क्लिन्ना ।५७। भेरुण्डा-वह्निनवासिनी-महावज्रेश्वरी-द्रुती-त्वरिता-देवी नवमी कुल सुन्दरी है ।५८। नित्या-नीलपताका-विजया-सर्वमंगला-ज्वालामालिका-चित्रा-ये पन्द्रह कही गयी हैं ।५९। ये सदा ही सेवा की ही बुद्धिवाली रहती है और इनको ही साथ में रखकर वह परमेश्वरी भण्डासुर पर विजय प्राप्त करने के लिए वहाँ से निर्गत हुई थी ।६०। महाचक्र में मन्त्रि नाथा और रथोत्तम चक्र में गीति थी । ये वहाँ पर सात पर्व हैं जो आपको बतला दिए गए हैं। वहाँ पर जो श्री देवी की हैं उनका भी श्रवण करिए ।६१। गेय चक्र रथ में पर्व के मध्य में पीठ और निकेतन वाली संगीत योगिनी कही गयी है जो श्री देवी की अत्यधिक वल्लभा (प्रिया) है ।६२। वह ही प्रथम पर्व है जो मन्त्रिणी की निवास की भूमि है । इसके उपरान्त गेयचक्र रथोत्तम में द्वितीय पर्व में स्थित ये हैं-।६३।

रतिः प्रीतिर्मनोजा च वीणाकार्मुकपाणयः ।
तमालश्यामलाकारा दानवोन्मूलनक्षमाः ॥६४
तृतीयपर्वसंरूढा मनोभूवाणदेवता ।
द्राविणी शोषिणी चैव बंधिनी मोहिनी तथा ॥६५