भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२५४ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

महती सिद्धलक्ष्मीश्च शोणा बाणधनुर्धराः ॥८० तस्यैव पर्वणोऽधस्ताद्गणपः क्षेत्रपस्तथा । दुर्गा वा बटुकश्चैव सर्वे ते शस्त्रपाणयः ॥८१ तत्रैव पर्वणोऽधस्ताल्लक्ष्मीश्चैव सरस्वती । शंखः पद्मो निधिश्चैव ते सर्वे शस्त्रपाणयः ॥८२ लोकद्विषं प्रति क्रुद्धा भंडं चंडपराक्रमम् । शक्रादयश्च विष्ण्वंतां दश दिक् चक्र नायकाः ॥८३ शक्तिरूपास्तत्र पर्वण्यधस्तात्कृतसंश्रयाः । वज्रं शक्ति कालदंडमसि पाशं ध्वज तथा ॥८४

त्रिशिख-पानपात्र को धारण करने वाले तथा नील वर्चस है । असिताङ्ग-रुरु-चण्ड-क्रोध-उन्मत्त भैरव-कपाली-भीषण और संहार-ये आठ भैरव हैं और गीति रथेन्द्र के सप्तम पर्व में संशय वाले हैं ।७८-७६। मातंगी सिद्ध लक्ष्मी-महामातंगिका-महती-सिद्ध लक्ष्मी-भूषोणा-बाणधनुर्धरा-है ।८०। उसी पर्व के नीचे गणप तथा क्षेत्रप हैं—दुर्गा अम्बा और वटुक हैं । ये सब करों में शस्त्र धारण करने वाले हैं ।८१। वहाँ पर ही पर्व के नीचे लक्ष्मी और सरस्वती हैं । शंख-पद्म-निधि हैं । ये सब प्राणियों में शस्त्र वाले हैं ।८२। ये सब लोकों के शत्रु चण्ड पराक्रम वाले भण्ड के प्रति क्रुद्ध हैं । शक्र से आदि लेकर विष्णु भगवान् के अन्त पर्यन्त दश दिशाओं के चक्रनायक हैं ।८३। वहाँ पर्व के नीचे शक्ति रूप वाले संश्रय लेने वाले हैं । ये वज्र-शक्ति-कालदंड-असि-पाशध्वज के धारण करने वाले हैं ।८४।

गदां त्रिशूलं दंभास्त्रं वज्रं च दधतस्त्वमी । सेवंते मंत्रिनाथां तां नित्यं भक्तिसमन्विताः ॥८५ भंडासुराङ्गदुर्गाढान्निहंतुं विश्वकंटकान् । मन्त्रिनाथाश्रयद्वारा ललिताज्ञापनोत्सुकाः ॥८६ गीतिचक्ररथोपांते दिक्पालाः संश्रयं ददुः । सर्वेषां चैव देवानां मन्त्रिणी द्वारतः कृतः ॥८७ विज्ञापना महादेव्याः कार्यसिद्धि प्रयच्छति ।