भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 704

२१४ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

शस्त्रों से प्रताड़ित होकर मूर्च्छा को प्राप्त हो गये थे और अन्त में विनष्ट हो गये थे ।४६। इसके अनन्तर अरियों का दमन करने वाले दुर्मद ने भग्न हुए अपने सैनिकों को समाश्वासन दिया था और फिर एक ऊँट पर चढ़कर वह तुरन्त ही सेना के ऊपर आक्रमण करने लगा था ।४७। दीर्घग्रीव निष्ठुर-तोदन वाला समुन्नद्ध होकर पीछे दुर्मद के साथ अधिष्ठित था और उसका वाहन वह ऊँट वहाँ से चल दिया था ।४८। उस उष्ट्र के वाहन वाले दुष्ट के पीछे अन्य दानव भी बड़े ही क्रुद्ध होकर अनुगमन कर रहे थे और वे अन्य दानवों को समाश्वासन देते जा रहे थे जो कि शक्ति के साथ युद्ध करने में डरे हुए थे ।४९।

अवाकिरद्दिशो भल्लैरुल्लसत्फलशालिभिः ।
संपत्करीचमूचक्रं वनं वारिभिरिवांबुदः ॥५०
तेन दुःसहसत्त्वेन ताडिता बहुभिः शरैः ।
स्तंभितेवाभवत्सेना संपत्कर्याः क्षणं रणे ॥५१
अथ क्रोधारुणं चक्षुर्दधाना संपदम्बिका ।
रणकोलाहलगजमारूढायुध्यतामुना ॥५२
आलोलकंकणक्वाणरमणीयतरः करः ।
तस्याश्चाकृष्य कोदण्डमोर्वीमाकर्णमाहवे ॥५३
लघुहस्ततयापश्यन्नाकृष्टन्न च मोक्षणम् ।
ददृशे धनुषश्चक्रं केवलं शरधारणे ॥५४
आश्वकांबरसंपर्कस्फुटप्रतिफलत्फलाः ।
शराः सम्पत्करीचापच्युताः समदहन्नरीन् ॥५५
दुर्मदस्याथ तस्याश्च समभूद्युद्धमुद्धतम् ।
अभूदन्योन्यसंघट्टाद्विस्फुलिंगशिलीमुखैः ॥५६

उल्लसित फलों वाले भालों से समस्त दिशाओं को अवकीर्ण कर दिया था और सम्पत्करी देवी की सेना का जो समूह था उसको इसी तरह से ढक दिया था जैसे मेघ जलों के द्वारा वन को आवृत कर दिया करता है । ।५०। उस दुःसह सत्त्व वाले के द्वारा बहुत से बाणों से ताड़ित हुई संपत्करी

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