संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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और उसकी केवल कथा ही शेष रह गयी थी ।६८। इसीलिए अपने बल के विनाश हो जाने से वे चमूवर बहुत क्रोधित हुए थे और उन्होंने सबने मिलकर अपने शस्त्रों के समूह से उस नकुली पर प्रबल प्रहार किये थे ।६६। उस सेना की स्वामिनी अकेली ही थी और तार्क्ष्य के रथ पर समारूढ़ थी । उस अकेली ही ने उन पांचों सेनापतियों के साथ शस्त्रों की वर्षा करने वाली ने बहुत ही हल्के हाथ होने से युद्ध किया था ।७०।
पट्टिशैर्मुसलैश्चैव भिन्दिपालैः सहस्रशः ।
वज्रसारमयैर्दन्तैर्व्यदशन्मर्मसीमसु ॥७१
ततो हाहारुतं घोरं कुर्वाणा दैत्यकिङ्कराः ।
उदग्रदंशनकुलैर्नकुलैराकुलीकृता ॥७२
उत्पत्य गगनात्केचिद्घोरचीत्कारकारिणः ।
दशन्तस्तद्विषां सैन्यं नकुलाः प्रज्वलत्क्रुधः ॥७३
कर्णेषु दष्ट्वा नासायामन्ये दष्टाः शिरस्तटे ।
पृष्ठतो व्यदशन्केचिदागत्य व्याकृतक्रियाः ॥७४
विकलाश्छिन्नवर्माणो भयविस्रस्तशस्त्रिकाः ।
नकुलैरभिभूतास्ते न्यपतन्नमरद्रुहः ॥७५
केचित्प्रविश्य नकुला व्यात्तान्यास्यानि वैरिणाम् ।
भोगिभोगानि वाकृष्य व्यदशन्नृसनातलम् ॥७६
अन्ये कर्णेषु नकुलाः प्राविशन्देववैरिणाम् ।
सूक्ष्मारूपा विशन्ति स्म नानारन्ध्राणि बभ्रवः ॥७७
पट्टिश—मुसल और सहस्रों भिन्दिपालों से तथा वज्र की शक्ति से पूर्ण दांतों से मर्मस्थलों में दंशन किया था प्रहार किया था ।७१। फिर तो समस्त दैत्यगण हाहाकार की ध्वनि करते हुए उन उदग्र दंशन करने वाले नकुलों के द्वारा बेचैन हो गये थे ।७२। उनमें कुछ तो आकाश से परम घोर चीत्कार करते हुए उत्पन्न कर रहे थे । अत्यन्त क्रोध से युक्त नकुल शत्रुओं की सेना का दंशन कर रहे थे ।७३। उन असुरों की उस समय में बहुत ही बुरी दशा हो गयी थी । कुछ तो कानों में काटे गये थे—कुछ नासिकाओं में और कुछ शिरों में दंशित किये गये थे एवं कुछ पीठ पर दंशन किये गये