संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकरंकादि पंच सेनापति वध ] [ ३१५
थे—इस तरह से सब की क्रियाएँ विनष्ट हो गयी थीं ।७४। ऐसे सबके सब वे बेचैन हो गये थे और उनके कवच छिन्न हो गये थे । भय के कारण उन्होंने अपने शस्त्रों को छोड़ दिया था । वे समस्त असुर नकुलों से पराभव को प्राप्त होकर निमलित हो गये थे ।७५। कुछ नकुल तो शत्रुओं के खुले हुए मुखों में प्रवेश करके सर्पों के मुखों (फनों) को खींचकर उनके रसना के तलों को काट रहे थे ।७६। अन्य नकुल शत्रुओं के कानों के छिद्रों में प्रवेश करके उन्हें दंशित कर रहे थे तथा वे नकुल उनके अनेक छिद्रों में में सूक्ष्म रूपों वाले होकर प्रविष्ट हो रहे थे ।७७।
इति तैरभिभूतानि नकुलैरवलोकयन् ।
निजसैन्यानि दीनानि करङ्कः कोपमास्थितः ॥७८
अन्येऽपि च चमूनाथा लघुहस्ता महाबलाः ॥७६
प्रतिबभ्रु शरस्तोमान्ववृषुद्वारिदा इव ।
दैत्यसैन्यपतिप्रौढकोदण्डोत्थाः शिलीमुखाः ।
बभ्रूणां दन्तकोटीषु कठोरघट्टनं व्यधुः ॥८०
चमूपतिशरव्यूहैराहतेभ्यः परःशतैः ।
बभ्रूणां वज्रदन्तेभ्यो निश्चक्राम हुताशनः ।
पञ्चापि ते चमूनाथाविसृष्टैरेकहेलया ॥८१
स्फुरत्फलैः शरकुलैर्बभ्रुसेनां व्यमर्दयत् ।
इतस्ततश्चमूनाथविक्षिप्तशरकोटिभिः ।
विशीर्णगात्रा नकुला नकुलीं पर्यवारयन् ॥८२
अथ सा नकुली बाणी वाङ्मयस्यैकनायिका ।
नकुलानां परावृत्त्या महांतं रोषमाश्रिता ॥८३
अक्षीणनकुलं नाम महास्त्रं सर्वतोमुखम् ।
वह्निज्यालापरीताग्रं संदधे शार्ङ्गधन्विनि ॥८४
इस प्रकार से अपनी सेनाओं को नकुलों के द्वारा अभिभूत हुईं देख कर तथा अपने सैनिकों को दीन अवलोकन करके करङ्क को बहुत अधिक क्रोध हो गया था ।७८। अन्य भी जो सेनानी थे वे भी बहुत ही हल्के हाथों