संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४८ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
अथ नीलपताका च विजया च जयोद्धते । जम्बुकाक्षं जृम्भणं च व्यतन्वातां रणे बलिम् । सर्वमंगलिका नित्या तीक्ष्णशृङ्गमखंडयत् । ज्वालामालिनिका नित्या जघानोग्रं त्रिकर्णकम् ॥६८
उन नित्याओं ने बड़ा ही उद्धत युद्ध किया था। उन्होंने प्राण को दंड को आकर्षित किया था। प्रहार करने के समय में नित्याओं के करों के वलयों और कङ्कणों का क्वणन हो रहा था ।६२। तीन प्रहर तक ऐसा घोर युद्ध हुआ था। नित्याओं के तीक्ष्ण बाणों से अक्षौहिणियों का संहार हो गया था ।६३। सर्व प्रथम कामेशी ने शरों से दुष्ट दमन को निहत किया था भग-माला ने सेनापति दीर्घ जिह्व को मार डाला था ।६४। नित्य क्लिन्ना और भेरुण्डा ने हुम्बेक और हुल्लुमल्लक को वह्निवासा ने क्लस को तीक्ष्ण शरों से निहत कर दिया था ।६५। महा वज्रेश्वरी ने बाणों से केकि वाहन को मार डाला था और शिव दूती ने पुल्कस को यमपुर भेज दिया था ।६४। त्वरिता ने पुण्ड्रकेतु को पैने बाणों से मार डाला था। कुल सुन्दरिका नित्या ने चंड बाहु और कुक्कुर को मार दिया था ।६७। इसके अनन्तर नील पताका और विजया दोनों ही जय करने में उद्धत थीं इन्होंने जम्बुकाक्ष और जृम्भण को मार दिया था। सर्वमङ्गलिका नित्या ने तीक्ष्ण शृङ्ग का हनन किया था। ज्वाला मालिनिका नित्या ने उग्र त्रिकर्णक का हनन कर दिया था ।६८।
चन्द्रगुप्तं च दुःशीलं चित्रं चित्रा व्यदारत् । सेनानाथेषु सर्वेषु निहतेषु दुरात्मसु ॥६६ विषंगः परमः क्रुद्धश्चचाल पुरतो बली । अथ यामाव शेषायां यामिन्यां घटिकाद्वयम् ॥१०० नित्याभिः सङ्ग्रामं विधाय स दुराशयः । अशक्यत्वं समुद्दिश्य चक्राम प्रपलायितुम् ॥१०१ कामेश्वरीकराकृष्टचापोत्थैर्निशितैः शरैः । भिन्नवर्मा दृढतरं विषंगो विह्वलाशयः । हतावशिष्टै योधैश्च सार्धमेव पलायितः ॥१०२